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आरा। दुर्गा पूजा के पावन त्योहार को लेकर शनिवार से आरा सहित पूरे शाहाबाद में माहौल पूजामय हो गया है। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां के भक्तों ने कलश स्थापना कर नवरात्रि की पूजा से सर्वत्र माहौल को भक्ति में डुबो दिया है। नवरात्रि की पूजा को लेकर चारों तरफ उत्साह और उमंग का वातावरण बन गया है। आरा, बक्सर, कैमूर और रोहतास जिलों के चौक – चौराहों, मुहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा समिति के सदस्यों ने कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू कर दी है। नवरात्रि के पहले दिन भक्तों ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में से पहले स्वरूप मां शैल पुत्री की पूजा की। निर्माणाधीन पंडालों के बीच, घरों और मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा की जा रही है। मंदिरों को सजाया गया है और प्रकाश और ध्वनि की व्यवस्था कर उसे जगमग किया गया है। सरकार और प्रशासन की  गाइडलाइन के बाद हालांकि इस बार आरा सहित शाहाबाद के चारों जिलों में पंडालों की संख्या उतनी नहीं होगी जितनी संख्या पूर्व के सालों में पंडालों की होती थी। वैश्विक महामारी कोविड-19 को ले इस बार बड़े पूजा पंडालों को पूजा की अनुमति नहीं दी गई है। इससे सीमित संख्या में ही चौक—चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। जहां पूजा पंडाल बनाये जा रहे हैं वहां भी भीड़ नहीं लगे इसका ध्यान पूजा समितियों को हर हाल में रखना होगा। भोजपुर जिले के मुख्यालय आरा में स्थित आरण्यदेवी मंदिर,ज्वाला माता मंदिर,नव दुर्गा मंदिर,पीताम्बरा माता मंदिर सहित सभी मंदिरों में पूजा को लेकर भव्य तैयारियां की गई हैं जहां शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैल पुत्री की पूजा—अर्चना की गई। कैमूर में माता मुंडेश्वरी, रोहतास में मां ताराचंडी, मां तुतला भवानी, बक्सर में मां दुर्गा मंदिर में विशेष तौर पर मंदिरों की सजावट की गई है जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इन मंदिरों में शारदीय नवरात्र पर भक्तों ने पूजा—अर्चना शुरू की है। माता के मंदिरों में माता के श्रृंगार किये गए हैं,आरती और मंत्रोच्चार से मंदिर गूंज रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन भक्तों ने श्री दुर्गा सप्तसती के पाठ भी किये और जयकारे भी लगाए। नवरात्र के अवसर पर भक्तों ने पूजन सामग्रियों की खरीद की और बाजारों में भीड़ रही।
   हर साल की भांति इस साल पूजा में पूजन सामग्री की खरीद बिक्री में काफी कमी आई है और कोविड-19 को लेकर भक्तों की संख्या पहले की अपेक्षा कम ही बाजारों में निकले हैं। बड़े पैमाने पर बड़े—बड़े पंडालों और पूजा समितियों को पूजा की अनुमति नहीं मिलने से बाजारों पर भी असर पड़ा है और पूजन सामग्री के बाजार पर इसका असर साफ दिखने लगा है। पहली बार आरा के रमना मैदान स्थित रामलीला मैदान में न ही वृंदावन की रामलीला मंडली आएगी और न ही रामलीला होगी। लगभग चार सौ साल से रामलीला के चल रहे आयोजन पर इस वर्ष रोक लग गयी है। चार सौ साल के इतिहास में आरा में पहली बार रावण वध नहीं होगा और रामलीला मैदान में सन्नाटा पसरा रहेगा। दुर्गापूजा के त्योहार पर घरों में पूजा करने की इस साल होड़ लगी हुई है और भक्त अपने अपने घरों में मां दुर्गा की मूर्ति और तस्वीर स्थापित कर पूजा में जुट गए हैं। भक्त घरो में ही कलश स्थापना कर पूजा कर रहे हैं। दूसरी तरफ पूजा पंडाल भी बनाये जा रहे हैं और उनमें कलश स्थापना कर पूजा शुरू की गयी है लेकिन वह पूजा पंडाल संख्या में पहले की अपेक्षा बहुत ही कम हैं। इस बार भक्त भी मां के दर्शन को शहरों में कम ही निकलेंगे और उत्साह और उमंग के बीच दुर्गापूजा का त्योहार फीका फीका रहेगा। 

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