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जालिम मुखिया हत्या का आरोपी होने के साथ- साथ हिन्दू विरोधी भी था, नेपाल के पूर्व प्रधान मंत्री प्रचण्ड से रहे है गहरे तालुकात

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सागर सूरज

मोतिहारी: भारत में नेपाल(Nepal) के पर्सा(Parsa) जिले के रहने वाले जालिम मिया उर्फ़ जालिम मुखिया(Jalim Mukhiya) के बारे में गृह विभाग का हाई अलर्ट जारी होने के बाद देश के लोगों को जालिम मिया के बारे में जानकारी प्राप्त करने की होड़ लग गयी है। एसएस बी के 47 वीं बाहनी के एक गोपिनिय रिपोर्ट में बताया गया था कि जालिम 40 से 50 कोरोना के संदिग्ध मरीजों को भारत में प्रवेश करवाने के फ़िराक में है। इसके बाद जालिम नेपाल के मीडिया के समक्ष आकर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि मेरे ऊपर लगे सारे आरोप बेबुनियाद है, जबकि बॉर्डर न्यूज़ मिरर ने जब जालिम मिया के गतिविधयों के बारे में तफसिस की तो उसके बारे में कई तरह की बाते प्रकाश में आई, जो साबित करता है की जालिम न केवल हिन्दू विरोधी है बल्कि अपराधिक चरित्र का भी व्यक्ति है, जो नेपाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी हो चूका है।

जालिम के नेपाल में पोलिटिकल प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसका फोटो कई बार नेपाल के पूर्व प्रधान मत्री एवं नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहाल के साथ उसकी कई फोटो तक प्रकाशित हो चुकी है वही उसको लोग जालिम मुखिया इसलिय कहते है क्योकि वह अपने गाँव जगरनाथपुर का वर्तमान निर्वाचित मुखिया है, जो कभी नेपाल के पर्सा जिला के खूंखार मावोवादी नेता के रूप में भी जाना जाता था। मादक पदार्थो, नकली भारतीय नोटों एवं हथियारों की तस्कारी उसका मुख्य पेशा है। जिसकी पुष्टि भी एसएसबी द्वारा की जा चुकी है।

नेपाल पुलिस की अगर माने तो जालिम मिया कभी माओवादियो से जुदा मुस्लिम मुक्ति मोर्चा नमक एक संस्था का निर्माण किया था, जिसका वो खुद ही चीफ भी था। जालिम मियाँ को जून 2010 मे उसके घर से हिन्दू यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष कासी तिवारी की हत्या के मामले नेपाल पुलिस गिरफ्तार की थी।

तब पुलिस ने कहा था कि तिवारी के हत्या के बाद नेपाल पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमे हिन्दू यूथ फेडरेशन के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। गिरफ्तार चारों लोगों के स्वीकारोक्ति व्यान पर जालिम मिया को गिरफ्तार किया गया था। इस हत्या में तत्कालीन मावोवादी नेता एवं सरकार के मंत्री रहे प्रभु साह का भी नाम खुल कर आया था।

बताया गया कि जालिम लॉक डाउन के दरम्यान नेपाल में जमात में भाग लेने आये भारतीय मुसलमानों को किसी भी तरह भारत में प्रवेश करवाना चाह रहा था। ये लोग कोविद-19 के संदेहास्पद मरीज थे, जिन्हें भारत में करोना फ़ैलाने के उद्देश्य से प्रवेश किया जाना था। सनद रहे कि नेपाल सीमा सील होने के बाद ऐसे लोगों को बीरगंज स्थित  भारतीय दूतावास के द्वारा क्वारेंटीन करने की बात कही गयी थी, लेकिन जालिम इन लोगों को अपने हिन्दू विरोधी नीतियों के कारण महामारी फ़ैलाने के लिय भारत भेजना चाहता था।

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