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डेढ़ सदी में पहली बार नगर भ्रमण के लिए नहीं निकल सके भगवान जगन्नाथ, मंदिर परिसर में निभाई गई परंपराएं

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अहमदाबाद। भगवान जगन्नाथ की 143वीं रथयात्रा को लेकर देररात तक हुई सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के यात्रा निकालने के अनुरोध को खारिज कर दिया। इस साल भगवान जगन्नाथ की यात्रा नगर में नहीं जा पायेगी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद डेढ़ सदी में पहली बार भगवान की रथयात्रा नगर का भ्रमण नहीं कर सके। मंदिर परिसर में ही तीनों रथों को घुमाया गया। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर परंपराएं निभाईं। 
मंगलवार को सुबह भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और साथ ही भाई बलराम के रथ को मंदिर परिसर में ही आयोजन किया गया। रथयात्रा के लिए 14 हाथियों को मंदिर परिसर में लाया गया है। सुबह 5.58 बजे भगवान जगन्नाथ को रथ में बैठाया गया है। फिर 6.03 बजे बहन सुभद्राजी और सुबह 6.09 बजे भाई बलराम को रथ में बैठाया गया। प्रत्येक रथ पर 10 नाविकों को रहने की अनुमति थी। सुबह-सुबह मंगला आरती के बाद भगवान की आंख से पट्टियां हटा दी गईं और जगन्नाथजी को बहुत ही प्रिय खिचड़ी का भोग लगाया गया। 10 मिनट में तीनों रथों ने एक-एक करके मंदिर परिसर की परिक्रमा की। हाथी घोड़ा पालखी जय कन्हैयालाल की के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गुंजायन रहा। मंदिर में दर्शन के लिए सुबह 9.30 बजे से भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर में आने वाले सभी श्रद्धालओं की थर्मल स्क्रीनिंग से जांच करने के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया। वर्तमान में जमालपुर ब्रिज के साथ ही हाथीखाना से भी बैरिकेड खोल दिए हैं।
इससे पहले सुबह 4 बजे भगवान जगन्नाथजी की मंगला आरती की गई। मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने सुबह 7 बजे भगवान के रथ के सामने सोने की झाड़ू से रथ की सफाई कर पहिंद विधि को पूरा किया और फिर भगवान का रथ रवाना हुआ।  मुख्यमंत्री ने भगवान जगदीश का रथ खींचा। 
देर रात हाई कोर्ट ने रथयात्रा को निकालने की अनुमति देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा, “ऐसी महामारी की स्थिति में, अदालत लोगों के जीवन को लेकर चिंतित है।” कोर्ट ने भगवान के रथ को मंदिर परिसर में घुमाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के गृह राज्य मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा, मेयर बिजल पटेल, मंदिर महंत और पुलिस प्रमुख शिवानंद झा ने बैठक की और रथयात्रा के तीनों रथ को मंदिर परिसर में ही घुमाने का निर्णय किया। 
डेढ़ सदी में पहली बार भगवान के रथ मंदिर से बाहर नहीं निकल सके। आज आषाढ़ी बिज के शुभ अवसर पर भगवान जगन्नाथजी, बहन सुभद्राजी और भाई बलभद्रजी की रथयात्रा केवल असली मंदिर के परिसर में घुमाई गई। हाई कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने से मंदिर प्रशासकों और भक्तों में गुस्सा था। विजय रूपाणी ने आषाढ़ी बीज के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कच्छ के लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

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