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गया| ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020′ के कई सकारात्मक पहलु हैं और इससे देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव होने की असीम संभावनाएं हैं।ये बाते दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. चंदन श्रीवास्तव ने ऑनलाइन वेबिनार में गुरुवार को कहीं।

 सीयूएसबी के जन संपर्क पदाधिकारी मो. मुदस्सीर आलम ने बताया विवि के शिक्षक-शिक्षा विभाग, शिक्षा पीठ द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020′ की विशेषताओं एवं संभावनाओं पर आयोजित 15 दिवसीय ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला के छठे व्याख्यान में डॉ. चंदन श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा निति – 2020 के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला। डा.श्रीवास्तव ने कहा कि 21वीं सदी की यह पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति लगभग चौंतीस (34) साल बाद आई है। जो भारत के स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव लाने की बात करती है। बहुप्रतीक्षित होने के कारण जनमानस की असीम अपेक्षाएं भी इस नीति से जुड़ी हुई हैं। इसलिए नीति के लागू होने से विद्यालयों में क्या आमूल-चूल बदलाव आएगा? इसके प्रति सबके मन में अपार जिज्ञासाएं हैं। नई शिक्षा नीति के कारण विद्यालय की कक्षाओं में क्या सार्थक बदलाव हो पायेगा? 
इस सन्दर्भ में डॉ. श्रीवास्तव द्वारा मुख्य बिन्दुओं की चर्चा की गई। उन्होंने नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा को लेकर सुझाई गयी नई ‘5+3+3+4’ व्यवस्था के मुख्य पहलुओं के बारे में बतलाया। उन्होंने यह विशेष रूप इसे समझाया कि जहां 10+2 की वर्तमान स्कूली व्यवस्था में शिक्षा की बुनियाद यानि ‘आरंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा’ पर कोई विशेष ध्यान नहीं है। वहीं आनेवाली नई व्यवस्था में विद्यालयों का सबसे ज्यादा ध्यान इसी पर होगा। डॉ. श्रीवास्तव ने यह बताया कि स्कूलों की ‘5+3+3+4’ व्यवस्था केवल संरचनात्मक बदलाव नहीं है।बल्कि बहुत ही चिंतनपरक परिवर्तन है। ऐसा नहीं है कि स्कूली शिक्षा में इस तरह का बदलाव ऐसे हीं सुझाया गया है।

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