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नक्सल प्रभावित पताही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों का घोर अभाव

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दिन के उजाले में दिखते चिकित्सक रात कटती भगवान भरोसे।

एईएस को लेकर विभाग दिखा चौकस।

✍नीरज कुमार सिंह

मोतिहारी,पूर्वी चंपारण। जिले के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित पताही प्रखंड क्षेत्र में तकरीबन दो लाख की आबादी पर स्थापित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के इलाज केवल दिन के उजालों में संभव है, रात में आए मरीजों का रात भगवान भरोसे कटता है, कहने को और दिखावे के लिए लिए तो यहां डॉक्टरों के लिए सुकृत 15 पदों में दो एमबीबीएस आयुष सहित 4 डॉ पदस्थापित जो दिन के उजाले में तो दिख जाते हैं। पर रात्रि में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीज की जिंदगी भगवान भरोसे कटती है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर आए दिन अस्पतालों में हो हंगामे मारपीट तक की नौबत बनी रहती है।

अधिकारियों के बार बार आग्रह के बाद यहां पदस्थापित डॉ अपने कर्तव्य के प्रति कितना सजग हैं, जिसे देखने के बाद सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। रात्रि ड्यूटी करना यहां पदस्थापित डॉ मुनासिब नहीं समझते हैं। कई बार घटना होने के बाद प्रथम उपचार के लिए आए मरीज की मौत चिकित्सकों के अभाव में हो जाते हैं। गर्मी के मौसम में उत्पन्न एईएस व लू मस्तिष्क ज्वर की कहर चल रहे हैं, इस स्थिति में कम संसाधनों के बीच उपलब्ध चिकित्सक गुरुवार को इलाज करते हुए मिले, आउटडोर में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मोहन प्रसाद, मौजूद थे वहीं इमरजेंसी वार्ड में आयुष चिकित्सक डा तरुण सिकदार, तो दिखे पर डॉ शंकर बैठा, सहित तीन चिकित्सक नहीं देख सके। इसमें एक चिकित्सक डॉ प्रेम सागर प्रसाद, घोड़ासहन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रबंधक अनिल कुमार, ने बताया कि महिला चिकित्सक पताही में 20 वर्षों से नहीं है।

यहां ट्रेन नर्सों के माध्यम से प्रसव कराए जाते हैं। संजोग बस यहां अभी तक चमकी बुखार या अन्य बीमारियों की मरीज नहीं मिल पाए हैं। हल्की बुखार से पीड़ित तिचार बच्चे पहुंचे थे जिन्हें नॉर्मल कर घर भेज दिया गया। अब सवाल यह उठता है कि सरकारी मानक के अनुसार 25 हजार की आबादी वाले क्षेत्रों में उप स्वास्थ्य केंद्र पर 7 दिनों तक 2 डॉक्टर 2 प्रशिक्षित एएनएम इमरजेंसी ड्रग्स एवं कीटो के साथ 24 घन्टे उपलब्ध कराने का निर्देश है। एसे मे जहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही डॉक्टरों का घोर अभाव है। पताही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जिहुली, कोदरिया, बाराशंकर, में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 उप स्वास्थ्य केंद्र के अलावा बखरी में हेल्थवेलनेस सेंटर भी संचालित होते हैं। जहां डॉ है ही नहीं। ऐसे में सरकार की घोषणा मूलभूत सुविधाएं स्वास्थ्य विभाग लचार दिखती है। अब सवाल यह उठता है, कि सरकार की बड़ी-बड़ी दावे सबका साथ सबका विकास क्या सही मायने में जमीनी स्तर पर दिख रहा है, यहां देखने से सहज अंदाजा लग जाता है। जो कई सवालों को जन्म देता है। जहां मरीजों को रात में भगवान भरोसे जीने मरने को छोड़ देते हैं, इतना ही नहीं इन उप स्वास्थ्य केंद्र और अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर कहीं डॉ नहीं तो कहीं भवन नहीं तो कहीं दवा नहीं जो सिस्टम की पोल खोल देती है। हालांकि सरकार द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। वही विगत 6 माह से एक्सरे और अल्ट्रासाउंड बंद पड़े हैं।

प्रसूति वार्ड में प्रशिक्षित एएनएम के भरोसे कराए जाते प्रसव

प्रसूति महिलाओं के लिए नहीं है खाने पीने की कोई इंतजाम

प्रसूति वार्ड में दो मरीज रानी देवी बखरी, पूजा कुमारी खुटौना, को प्रसव के बाद खून की कमी को देखते हुए वार्ड इंचार्ज सह एएनएम प्रेमप्रभाव खलको, अनिता लकड़ा, ने बेहतर चिकित्सा के लिए सदर अस्पताल मोतिहारी रेफर कर दी है । मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछने पर बताती हैं कि दवा के अलावा मरीजों के लिए नाश्ता और भोजन की इंतजाम नहीं किए जाते हैं। वही दवा इंचार्ज विकास कुमार, ने बताया कि उक्त अस्पताल में 43 तरह की दवाएं उपलब्ध है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ मोहन प्रसाद, ने बताया कि जेइ/एईएस निदान तथा उपचार को लेकर पूरी तरह से तैयारी की गई है। अभी तक इस पर अस्पताल में को ऐसे मरीज नहीं मिले हैं। सोनाली कुमारी 3 वर्ष, विजय राउत 4 वर्ष, आयरन कुमार 4 वर्ष, पल्लवी कुमारी 5 वर्ष, के बच्चे हल्के बुखार से आए थे जिन्हें चिकित्सकीय उपचार के बाद घर भेज दिया गया है। रात्रि ड्यूटी डॉक्टरों से लिया जा रहा है। डॉक्टर के रहने को स्वास्थ्य केंद्र में अभाव है। जिसको लेकर कई बार जिला स्वास्थ्य समिति को भी लिखा गया है।

क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी

डॉ मोहन प्रसाद ने बताया कि डॉक्टरों के लिए रहने का आवास नहीं है,सुरक्षा का घोर अभाव है, एसे में डॉ रहना पसंद नहीं करते हैं। अभी जेई एईएस को लेकर पूरी तरह से तैयारी की गई है।

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