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पत्नी की प्रेरणा से जैविक खेती करने वाले गोपाल का धनिया गिनीज बुक रिकार्ड में शामिल

अल्मोड़ा। हर सफलता प्राप्त करने वाले व्यक्ति के पीछे औरत का हाथ होता है। इन औरतों में मां, बहन, पत्नी या मित्र हो सकती है। इस कहावत को अल्मोड़ा के ताडीखेत के बिल्लेख निवासी  गोपाल दत्त उप्रेती ने सच कर दिखाया है। गोपाल ने बिल्लेख में सात फीट एक इंच ऊंचा धनिया का पौधा उगाया है। आश्चर्यपूर्ण लंबाई के लिए यह धनिया गिनीज बुक ऑफ  वर्ल्ड रिकार्ड में शामिल हो गया है।  
अपने गांव में जैविक खेती करने वाले गोपाल दत्त उप्रेती बिल्लेख में फल और सब्जी का उत्पादन करते हैं। उनका सेब का बगीचा भी है। वह कहते हैं कि जैविक खेती की प्रेरणा उन्हें उनकी पत्नी ने दी। अब  जैविक उत्पादों की मांग तेजी से महानगरों में बढ़ रही है। 
उन्होंने बताया कि इस धनिया को देखने अप्रैल में अप्रैल में उद्यान विभाग की टीम आई थी। टीम ने उम्मीद जताई थी कि यह धनिया गिनीज रिकार्ड में दर्ज हो सकता है। उप्रेती का कहना है कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज विश्व के सबसे सर्वाधिक लंबे के धनिए के पौधे ( ऊंचाई 5 फुट 11 इंच) को उन्होंने चुनौती दी,  क्योंकि उन्होंने जो धनिया का पौधा  उगाया उसकी लंबाई 7 ​फीट एक इंच है। इसे गिनीज बुक ने इसे Title:Tallest coriander plant of world के रूप में दर्ज किया है। 
उप्रेती का कहना है कि धनिया की फसल पूर्ण रूप से जैविक तथा बिना पॉलीहाउस के उगाई गई।  उनकी पत्नी बीना उप्रेती ने उन्हें जैविक खेती के लिए प्रेरित किया। साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, नैनीताल से सांसद अजय भट्ट,  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अजय टम्टा तथा पूर्व सीएम हरीश रावत ने उनका उत्साहवर्द्धन किा। उन्होंने कहा कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से लेकर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तक की यात्रा में नितिन जोशी, बड़े भाई टीसी उप्रेती, मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे, उत्तराखंड ऑर्गेनिक बोर्ड के सेंट्रल इंचार्ज रानीखेत के डॉक्टर देवेंद्र सिंह नेगी, एडीओ ताड़ीखेत इन्द्र लाल तथा प्रभारी बिल्लेख राम सिंह ने सहयोग दिया।
उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान उगाए गए  इस धनिया को प्राप्त यह उपलब्धि सभी को जैविक खेती के प्रति आकर्षित करेगी। उत्तराखंड में जैविक बागवानी और कृषि की अपार संभावनाएं हैं । धनिया की फसल ने इस बात को सिद्ध कर दिया है। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने से जैविक बागवानी कृषि को बढ़ावा मिलेगा तथा देश के किसानों में प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न होगी। 

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