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प्रशिक्षण प्राप्त नर्स की सकारात्मक पहल और उचित इलाज से बची एक नवजात की जान

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बेगूसराय। सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण के साथ ही प्रसूति महिलाएं के लिए उचित प्रबंधन और समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होना कितना जरूरी है। यह बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल पीएचसी में देखने को मिला। जहां जन्म लेने के बाद से ही सांस की समस्या से जूझ रहे नवजात एवं उनके चिंतित परिजनों को ना सिर्फ बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिली, बल्कि, ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की सकारात्मक पहल और उचित प्रबंधन के साथ समुचित इलाज से शुक्रवार को नवजात की जान भी बची।

यह एक बानगी है, इससे पूर्व में भी कई ऐसे नवजात का उचित प्रबंधन एवं स्वास्थ्य कर्मियों की सकारात्मक पहल से कई जान बच चुकी है। स्वास्थ्य कर्मियों की सकारात्मक पहल से सकारात्मक बदलाव भी दिखने लगे हैं। बदलाव यह कि लोगों का पूर्व की भांति अब संस्थागत प्रसव पर विश्वास बढ़ने लगा है, लोग संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने लगे हैं। मामला श्रीनगर, साहेबपुर कमाल निवासी रोहित कुमार की पत्नी राखी कुमारी से जुड़ा है। राखी को साहेबपुर कमाल पीएचसी में सामान्य प्रसव हुआ था और जन्म के बाद ही नवजात सांस की समस्या से पीड़ित हो गया। जो कि ड्यूटी पर तैनात अमानत का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी जीएनएम प्रेमलता कुमारी एवं एएनएम उषा कुमार तथा केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक ज्योति कुमारी की सकारात्मक पहल और उचित इलाज से पूर्ण रूप से स्वस्थ हुआ।

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साहेबपुर कमाल पीएचसी प्रभारी डॉ. बीके गुप्ता ने बताया कि नवजात सांस से संबंधित परेशानी से ग्रसित था। वह सांस नहीं ले पा रहा था, इस स्थिति में ससमय उचित इलाज की जरूरत होती है। ऐसे में अमानत का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी जीएनएम प्रेमलता कुमारी, एएनएम उषा कुमार तथा केयर इंडिया की प्रखंड प्रबंधक ज्योति कुमारी की पहल से नवजात का समय पर इलाज शुरू हुआ। जिससे नवजात की जान बची और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद ही पीएचसी से छुट्टी दी गई। नवजात अब अपने घर में पूरी तरह स्वस्थ है।

जीएनएम प्रेमलता कुमारी ने बताया कि पहले पीएचसी प्रभारी की देखरेख में नवजात का आवश्यक इलाज हुआ। इसके बाद नवजात की माता को कंगारू मदर केयर तकनीक की जानकारी दी एवं उसे अपनाने की तरीके बताये, जो नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण में काफी कारगर साबित हुआ।

पीड़ित नवजात की मां राखी देवी ने बताया कि एएनएम दीदी, केयर इंडिया की दीदी एवं पीएचसी के डाॅक्टर की सकारात्मक पहल से ही मेरे बच्चे की जान बची। अगर समय पर मेरे बच्चे का इलाज शुरू नहीं करते तो शायद मेरा बच्चा आज मेरा नहीं रहता। डाॅक्टर धरती का भगवान तो नर्स देवी हैं, मेरे बच्चे को बचाने में सभी ने पूरा जी जान- लगा दिया। अन्य लोगों से भी अपील करती हूँ कि किसी प्रकार की परेशानी होने पर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में ही इलाज करवाएं। यहां मुफ्त में सही और समुचित इलाज किया जाता है।

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