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मोतिहारी: विधान सभा चुनाव को लेकर वोटिंग की तारीख ज्यों-ज्यों नजदीक आती जा रही है, त्यों-त्यों प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में भी गति आती जा रही है हलाकि इन सबों के बीच प्रत्याशियों को लेकर मतदाता भी पूरी तरह किंककर्तब्यविमूढ़ है।

अगामी विधान सभा चुनाव कई मामलों में पूर्व के चुनाव से अलग एवं अजीव है वही इस चुनाव में पार्टियों का सभी जातीय समीकरण भी ध्वस्त होता नजर आ रहा है साथ ही इस चुनाव में व्यक्तिगत संबंधों एवं प्रत्याशियों के जातीय आधार का प्रभाव भी काम ही दिख रहे है।

 इधर मोतिहारी और हरसिद्धि विधान सभा छोड़ कर सभी सीटों पर कही तीन कोणीय तो कही बहु कोणीय लड़ाई की संभावना दिख रही है। राजद एवं भाजपा गठबन्धनों के भी आपने-अपने जातीय समीकरण कई जगह ध्वस्त होता नजर आ रहा है। जानकार बताते है कि इसका मुख्य कारण प्लुराल्स पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, जनाधिकार पार्टी एवं रालोसपा का राजद गठबंधन एवं भाजपा गठबंधन से अलग अपना-अपना गठबंधन बना क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारना बताया जाता है।

इन पार्टियों ने राजद एवं भाजपा गठबन्धनों के सभी उन मजबूत दावेदारों को टिकट दे दिया है जो अपने-अपने पार्टियों के टिकट से बंचित रह गए थे वही कई तो निर्दलीय भी आ कर चुनाव को ना केवल रोचक बना दिए है बल्कि लड़ाई को बहुकोणीय भी बना दिए है।

केसरिया विधान सभा को ही देखिय- जहाँ जदयू से चार बार सांसद रहे कमला मिश्र मधुकर की पुत्री शालिनी मिश्रा जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रही है वही पूर्व विधायक महेश्वर सिंह रालोसपा के टिकट पर मैदान में है वही राजद के निवर्तमान विधायक डॉ राजेश पार्टी के टिकट से बंचित होने के बाद निर्दलीय ही चुनाव लड़ रहे है वही राजद ने संतोष कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया है तो एक स्थानीय मजबूत प्रत्याशी रामशरण यादव निर्दलीय ही चुनावी समर में कूद पड़े है। यहाँ भी सभी पार्टियों के जातीय समीकरण ध्वस्त हो गए है, जहाँ कुशवाहा मतों में भारी बिखराव के अलावा भाजपा गठबंधन के मतों में भी भारी सेंध लगती दिख रही है साथ ही रामशरण यादव के रूप में एक प्रभावशाली यादव के आने के बाद राजद के एम-वाई समीकरण की गांठ भी ढीली होती दिख रही है। यही हालत कमोवेश गोविन्द गंज, ढाका, मधुबन, चिरैया, रक्सौल, नरकटिया, सुगौली विधान सभाओं का भी है।

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