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हिन्द महासागर में डकैतियां रोकने को नौसेना ने खरीदे 4 और समुद्री विमान पी-8 आई

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नई दिल्ली। हिन्द महासागर (आईओआर) में समुद्री डकैतियों पर रोक लगाने के मकसद से भारतीय नौसेना ने 2008 से लगातार अपना एक युद्धपोत तैनात कर रखा है। अब भारत ने 4 और समुद्री विमान पी-8 आई खरीदे हैं। इनके अगले साल मिलने के बाद नौसेना की समुद्र में लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी, टोही, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग क्षमता बढ़ जाएगी।
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ आक्रामक चीन के साथ गतिरोध से काफी पहले नवंबर 2019 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने छह पी-8आई की खरीद को मंजूरी दी थी। हिन्द महासागर क्षेत्र में सभी महत्त्वपूर्ण चोक पॉइंट्स पर निगरानी रखने के लिए भारत ने वर्ष 2012 में अमेरिका से 12 ‘पी-8आई’ समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों का 2.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर में सौदा किया था। नौसेना ने अब फिर 4 और मल्टीमिशन समुद्री विमान पी-8आई खरीदने का सौदा किया है, जो अगले साल मिलेंगे। यह नौसेना की आईओआर में एएसडब्ल्यू, पुनर्गठन, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग क्षमताओं को बढ़ाएगा। भारत के पास बोइंग कम्पनी से छह और को खरीदने का विकल्प है, जिस पर 2021 में बातचीत होगी।  
भारतीय नौसेना ने अक्टूबर 2008 से अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी गश्त शुरू की थी। नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मिशन आधारित तैनाती के तहत अदन की खाड़ी में गश्त करने के लिए यह कदम उठाया है। नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में हर चोक पॉइंट पर हर समय एक जहाज तैनात रखती है। इससे भारतीय ध्वजवाहक जहाजों को आगे बढ़ाने के अलावा हिन्द महासागर से गुजरने वाले अन्य देशों के जहाजों को भी सुरक्षा दी जाती है। समुद्री लुटेरों से बचाने के लिए अन्य देशों के जहाजों को उनके देश की समुद्री सीमा तक पहुंचाने में भी भारतीय नौसेना मदद करती है। इसी का नतीजा है कि अब तक कोई भी जहाज समुद्री लुटेरे अपहृत नहीं कर पाए हैंं।
नौसेना के जहाजों की तीन-तीन माह के लिए तैनाती होती है। अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती रोधी गश्त के लिए तैनात आईएनएस सुनयना तीन माह का मिशन पूरा करके 22 मई को दक्षिणी नौसेना कमान के तहत कोच्चि बंदरगाह पर लौटा था। इसके बाद दूसरे जहाज को अगले तीन माह के लिए तैनात किया गया है। नौसेना ने समुद्री डकैती रोकने के लिए ‘पी-8आई’ लॉन्ग रेंज मेरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट’ तैनात कर रखा है। यह लंबी दूरी की पनडुब्बी-रोधी वारफेयर, एंटी-सरफेस वारफेयर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही विमान’ हैं और व्यापक क्षेत्र, तटीय तथा समुद्री परिचालन में सक्षम हैं। लॉन्ग रेंज पनडुब्बी रोधी, सतह रोधी, खुफिया, निगरानी और टोही विमानों का उपयोग समुद्री और तटीय युद्ध कार्रवाइयों के लिए किया जाता है।

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