मोतिहारी निकाय चुनाव : पहले “पपेट एमएलए” अब पपेट मेयर उप मेयर के लिये वोटरों पर हमला

सभी प्रत्याशियों की मोर्चा बंदी शुरू , भाजपा की ओर से पूर्व विद्यायक ने संभाला मोर्चा

 मोतिहारी निकाय चुनाव : पहले “पपेट एमएलए” अब पपेट मेयर उप मेयर के लिये वोटरों पर हमला
नगर निकाय चुनाव के लिए भी श्री सिंह ने परिस्थितियों के अनुसार नेतृत्व के नामों की घोषणा कर दी है | इस बार मोतिहारी नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेवारी केसरिया के पूर्व विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह को दी गयी है और वो अपने कार्य में लग भी गए है | सवाल ये है कि सचिन्द्र प्रसाद सिंह ही क्यों ?.

सागर सूरज

 

मोतिहारी: जैसे जैसे नगर निकाय चुनाव के वोटिंग का दिन नजदीक आता जा रहा है बाकि प्रत्याशियों के साथ- साथ भाजपा ने भी अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है | पार्टी स्तर पर चुनाव नहीं होने के वावजूद भाजपा के मोतिहारी सांसद सह पूर्व केन्द्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह ने मेयर के रूप में प्रकाश अस्थाना और उप मेयर में रूप में डॉ लाल बाबु प्रसाद के नामों की घोषणा कर दी थी | यही कारण है कि भाजपा के इस बड़े नेता की प्रतिष्ठा अब दांव पर लग गयी है |

नगर निकाय चुनाव के लिए भी श्री सिंह ने परिस्थितियों के अनुसार नेतृत्व के नामों की घोषणा कर दी है | इस बार मोतिहारी नगर निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेवारी केसरिया के पूर्व विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह को दी गयी है और वो अपने कार्य में लग भी गए है | सवाल ये है कि सचिन्द्र प्रसाद सिंह ही क्यों ?.

भाजपा के अन्दर खाने की भरोसा करें तो भाजपा के लोग वैसे तो मेयर के रूप में अपना प्रतिद्वंदी देवा गुप्ता के पत्नी प्रीति गुप्ता को बता रहे है, लेकिन असल में रघुनाथपुर के पूर्व मुखिया विनय सिंह को ही अपना प्रतिद्वंदी मान रहे है | उनका मानना है कि कुछ ख़ास बेल्ट के कई गांवों के निचले तबके के लोग विनय सिंह के पक्ष में रुझान दिखा सकते है और भूमिहार मत पर वैसे ही विनय सिंह का प्रभाव जातीय आधार पर ज्यादा होगा ही ऐसे में पूर्व विधायक भूमिहार जाती के होने के कारण भूमिहारों के मतों में सेंह लगा सकते है |

इधर ब्राभो फार्मा के चेयरमैंन भी भाजपा के विरोध में खड़े दिख रहे है | उनका मानना है कि मोतिहारी भाजपा में नक्कारा लोग भरे पड़े है | वही पूर्व नगर परिषद् अध्यक्ष अंजू गुप्ता भी भाजपा के बैश्य मतों में बंटवारे की युगत में लगी है ऐसे में चुनाव रोचक बनता जा रहा है |

भाजपा के इस जिले के बड़े नेता के राजनीतिक हथकंडे पर अगर नजर डाली जाए तो जब जब उनको किसी ख़ास जाती के नेता से चुनौती मिली है तब तब वे इन चुनौतियों को ऐसे ही उसी जाती के भाजपा नेता या समर्थित लोगों से काउंटर करवाते रहे है |

 अभी हाल में ही राधा मोहन सिंह द्वारा नगर निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गयी तो ढाका के भाजपा विधायक पवन जयसवाल ने इसका पुरजोर विरोध किया, नतीजतन पवन जयसवाल के विरुद्ध में सोनू मुखिया को लाया गया, जहाँ सोनू मुखिया ने पवन जयसवाल पर हमला बोलते हुए कई तरह के तीक्ष्ण आरोप लगाये |

हालाँकि, तब सोनू मुखिया ने इन आरोपों को कि किसी प्रभाव में बोले जाने की बात से सीधे इनकार कर दिया था लेकिन ‘बीएनएम’ को दिए साक्षात्कार में सोनू ने भाजपा नेता राधा मोहन सिंह की तारीफ की थी |

यही नहीं सांसद बिहार कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ अखिलेश प्रसाद सिंह के मामले में उनपर आरोप लगाने के मामले में सचिन्द्र प्रसाद सिंह और भाजपा के अखिलेश सिंह ही मीडिया को संबोधित करते रहे | कभी भी भाजपा के किंग मेकर खुद सामने नहीं आये|

बताया जाता है कि किसी भी पद को लेकर सता का बागडोर किंग मेकर अपने सबसे ज्यादा चहेते को ही दिलवाते रहे है | यानी ‘वर्चुअल’ रूप से इस जिले में विधायक और सांसद सभी एक ही व्यक्ति है, भाले ही इसमें एक दो अपवाद हो सकते है लेकिन ‘ज्यादातर’ की पहचान पपेट एमएलए के रूप में ही है | अब किंग मेकर की नजर नगर निकाय पर है |

मैदान में मेयर पद के लिए कई नाम सामने आ रहे है इसमें प्रकाश अस्थाना, विनय सिंह, प्रीति गुप्ता, मंजू गुप्ता और रंजित गिरी अदि प्रमुख है | कौन जीतेगा कौन हारेगा यह कहना मुश्किल है, परन्तु नगर निकाय चुनाव को लेकर अचानक आई गर्माहट और देवा गुप्ता की पत्नी जैसे प्रत्याशी के मैदान में आने से चुनाव रोचक हो गया है |

 
 
 
 

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