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रायपुर : टैलेंट, युवा और स्थानीय संशाधनों से तैयार हुआ विकास का छत्तीसगढ़ मॉडल : बघेल

रायपुर।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि स्थानीय टैलेंट, स्थानीय युवा और स्थानीय संशाधनों के उपयोग से हम विकास के छत्तीसगढ़ मॉडल को और ज्यादा विस्तार देंगे। इससे छत्तीसगढ़ का हर क्षेत्र समृद्ध और खुशहाल होगा। मुख्यमंत्री रविवार को प्रसारित मासिक रेडियोवार्ता लोकवाणी की 22 वीं कड़ी में जनता से ‘जिला स्तर पर विशेष रणनीति से विकास की नई राह‘ विषय पर बातचीत कर रहे थे। इस विषय पर यह लोकवाणी की दूसरी कड़ी है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए प्रदेशवासियों को नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, देवारी, गौरा-गौरी पूजा, मातर, गोवर्धन पूजा, छठ पर्व, भाई-दूज आदि त्योहारों की शुभकामनाएं दीं।
नरवा योजना में 30 हजार नालों में होंगे जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नरवा योजना के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि नरवा योजना के तहत प्रदेश के 30 हजार नालों में जल संरक्षण और संवर्धन का कार्य करने की शुरुआत की गई है। जिससे किसानों को पानी की चिंता से छुटकारा मिले। लोकवाणी में कोरबा जिले के ग्राम लबेद के टीकाराम राठिया ने बताया था कि उनके गांव के नाले पर बने बांध से अब लगभग साढ़े तीन सौ एकड़ में किसान धान और साग-सब्जी की खेती कर रहे हैं। बघेल ने कहा कि लबेद गांव में 25 साल पहले मिट्टी का बांध बनाकर पानी रोका गया था। जिला प्रशासन ने अच्छी पहल करते हुए दो करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से इस बांध का वैज्ञानिक ढंग से पुनरोद्धार और नवनिर्माण का कार्य कराया, जिससे इस बांध की सिंचाई क्षमता दोगुनी हो गई है।
आईआईटी रूड़की के सहयोग से नारायणपुर जिले के 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार
बघेल ने कहा कि अबूझमाड़ को ठीक ढंग से बूझने की दिशा में हमने ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्दी ही इसका लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगेगा। लोकवाणी में अबूझमाड़ के नारायणपुर जिले के सत्यनारायण ने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में राजस्व भूमि के सर्वे के बाद गांवों के लोगों की जमीन का पट्टा बन गया है। अब वे लोग धान बेच रहे हैं। भूमि का समतलीकरण किया गया है और उन्हें राज्य शासन की अन्य योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने इसके लिए ग्रामवासियों की ओर से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री बघेल ने इस संबंध में कहा कि अबूझमाड़ का मतलब ऐसा वन क्षेत्र जिसे बूझा नहीं जा सकता। जब हमारी सरकार आई मुझे लगा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि प्रदेश का कोई क्षेत्र अबूझा रह जाए, जहां की आशाओं को समझने जनसुविधाओं और विकास की योजनाओं को पहुंचाने की कोई व्यवस्था ही न हो। उन्होंने कहा कि जब जांच कराई गई तो पता चला कि नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के 237 गांव और नारायणपुर विकासखंड के नौ गांव असर्वेक्षित हैं। जिसके कारण किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक ओरछा विकासखण्ड के चार तथा नारायणपुर विकासखण्ड के नौ गांवों का प्रारंभिक सर्वे पूर्ण कर उन्हें र्भुइंयां साफ्टवेयर के साथ जोड़ा गया है तथा छह अन्य ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य प्रक्रिया में है। आईआईटी रूड़की के सहयोग से 19 ग्रामों का प्रारंभिक नक्शा एवं अभिलेख तैयार कराया गया है। ओरछा विकासखण्ड से एक हजार 92 तथा नारायणपुर विकासखण्ड से एक हजार 842 ग्रामीणों ने विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन दिए हैं। इन आवेदनों पर कार्रवाई करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है।
जशपुर जिले के कांसाबेल, बालाछापर और गुटरी गांव में 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार
बघेल ने जशपुर जिले में चाय की खेती से ग्रामीणों को मिल रहे लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि असम की तरह अब जशपुर में भी चाय के बगान दिखने लगे हैं। इसके पीछे स्थानीय समुदाय की ताकत है। जशपुर जिले के चाय के बागान लोगों की आय का बड़ा जरिया बनेंगे। जशपुर विकासखण्ड के सारूडीह गांव में चाय की खेती हो रही है। लोकवाणी में जशपुर निवासी अशोक तिर्की ने मुख्यमंत्री से जानना चाहा कि जशपुर में चाय की खेती सफल हो सकती है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि संयुक्त वन प्रबंधन समिति सारूडीह के अंतर्गत स्व-सहायता समूह के अनुसूचित जनजाति के 16 परिवारों के सदस्यों से मिला जा सकता है, जिन्होंने जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से 20 एकड़ क्षेत्र को चाय के बागान में बदल दिया है। मनोरा ब्लॉक में कांसाबेल, जशपुर ब्लॉक में बालाछापर और गुटरी में भी 60 एकड़ रकबे में चाय के बागान तैयार हो गए हैं।डीएमएफ मद के सदुपयोग के चमत्कारिक नतीजेकबीरधाम जिले के बंसत यादव ने डीएमएफ मद से किए जा रहे कार्याे की सफलता के बारे में मुख्यमंत्री से जानना चाहा। उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में डीएमएफ मद से शिक्षित युवाओं को शाला संगवारी के रूप में रोजगार दिया जा रहा है। बाइक एम्बुलेंस तथा सुपोषण अभियान जैसे कामों में मदद की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ की राशि वास्तव में उन क्षेत्रों की अमानत है, जहां खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण, स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षण, पोषण आदि गतिविधियों पर असर पड़ता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने डीएमएफ की राशि के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए, जिससे इस राशि का उपयोग वास्तव में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के विकास में, पुनर्वास में हो सके।
फमहिला समूहों का 13 करोड़ रुपये का कालातीत ऋण म
राजनांदगांव जिले के ग्राम मनगटा के प्रियंबिका स्व-सहायता समूह की रामेश्वरी साहू ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वे स्वयं गौठान में वर्मी कम्पोस्ट के निर्माण सहित विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी है। उनके गांव की 28 समूहों की 50 दीदियों ने रक्षा बंधन पर्व पर धान, बीज, गेहूं, चावल, बांस की राखियों का निर्माण किया था। ई-कॉमर्स पर लगभग दो लाख 30 हजार से अधिक राशि की 25 हजार से अधिक राखियों का देश-विदेश में ऑनलाइन व ऑफलाइन विक्रय किया गया। उन्होंने बताया कि हम लोगों द्वारा बनाई गई राखी राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने अमेजान से मंगाकर आपको बांधी थी। उन्होंने कहा कि हम लोग द्वारा बनाई राखी पहनकर आपने हमारा मान-सम्मान बढ़ाया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा महिला कोष से लिए गए लगभग 13 करोड़ रुपये के कालातीत ऋण माफ किया गया। इससे अब वे नया ऋण ले सकेंगी। महिला कोष से महिला समूहों को दी जाने वाली राशि दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है और ऋण सीमा को एक लाख से बढ़ाकर दो लाख कर दिया गया है।
जिलों में जनसमस्या निवारण की सुविधाजनक प्रणाली विकसित करेंसूरजपुर जिले की गुरूचंदा ठाकुर ने सूरजपुर जिले में जनसमस्याओं के निवारण के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभ किए गए जन संवाद कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी और गांव के अनेक लोगों की अनेक समस्याओं का समाधान इस नई व्यवस्था से हुआ है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में कहा कि जिलास्तर पर की गई इस पहल का लाभ लोगों को मिल रहा है। आदिवासी अंचल और वन क्षेत्र होने के कारण आवागमन की दिक्कत भी है। जिसके कारण लोगों को सरकारी ऑफिस में पहुंचना कठिन होता है। सूरजपुर जिले में जन संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत कॉल सेंटर के माध्यम से जिला मुख्यालय में सभी विकासखण्ड मुख्यालयों की समस्याएं सुनी जाती हैं। फोन रिसीव किए जाते हैं और आवेदन की कापी व्हाट्सअप पर ली जाती है। ज्यादातर मामलों में 24 घंटे के भीतर समस्या का समाधान हो जाता है। कॉल सेंटर के माध्यम से राजस्व संबंधी सीमांकन, बटांकन, ऋण पुस्तिका, ऑनलाईन रिकार्ड आदि सारे काम हो रहे हैं। किसी को पेंशन में समस्या है, राशन कार्ड बनवाना है, नाम जुड़वाना है, सड़क, नाली, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन आदि की मांग है।

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Updated on October 27, 2021 8:46 am