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                <title>पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकियां लगाकर पास के मंदिरों में पूजा-अर्चना किया</title>
                                    <description><![CDATA[पटना । कार्तिक माह के अवसर पर उत्तर वाहिनी गंगा नदी के तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में डुबकियां लगाकर पास के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। चतुर्मास की समाप्ति एवं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अनुमंडल के उमानाथ,अलखनाथ सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बिहार का काशी(बनारस)के नाम से प्रसिद्ध बाढ़ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/6520/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%81%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/7c83725ad9b487dd7c25a7c61859c413ab3775b9317463afa581e74d17061817_1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>पटना ।</strong></span> कार्तिक माह के अवसर पर उत्तर वाहिनी गंगा नदी के तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में डुबकियां लगाकर पास के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। चतुर्मास की समाप्ति एवं कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अनुमंडल के उमानाथ,अलखनाथ सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।</span></div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">बिहार का काशी(बनारस)के नाम से प्रसिद्ध बाढ़ अनुमंडल के उत्तरायण भागीरथी गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व धर्मशास्त्रों में माना गया है।इस कारण पूरे राज्य के कोने-कोने से यहां श्रध्दालु भागीरथी गंगा नदी में स्नान करने के लिये आया करते हैं और मनोकामना नाथों में एक नाथ “उमानाथ- महादेव” की पूजा-अर्चना करते हैं।</span></div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">शास्त्रों के अनुसार यहां भगवान “उमानाथ शंकर” की पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामनायें पूर्ण होती है। इस कारण “उमानाथ-महादेव” की गणना काशी(बनारस) के भगवान विश्वनाथ शंकरजी से धर्मग्रन्थों में किया गया है।</span></div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर एसडीएम सुमित कुमार एवं एसपी अंबरीश राहुल के नेतृत्व में बाढ़ थानाध्यक्ष संजीत कुमार सहित अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों ने अनुमंडल के विभिन्न गंगा घाटों पर प्रशासनिक व्यवस्था काफी चुस्त-दुरुस्त रखा।</span></div>
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                <pubDate>Mon, 30 Nov 2020 17:09:41 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में हिस्सा लिया</title>
                                    <description><![CDATA[ऋषिकेश। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल  सपरिवार गुरुवार रात परमार्थ निकेतन में रुके। शुक्रवार सुबह परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती  और डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य मेंगंगा आरती में हिस्सा लेते हुए विश्व शांति की प्रार्थना की। वह नवरात्रि की सप्तमी तिथि के अवसर पर होने वाले हवन में श्रद्धापूर्वक सहभाग कर राष्ट्रगान […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/5531/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%A4-%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B2"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/ghhgd.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ऋषिकेश।</strong></span> राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल  सपरिवार गुरुवार रात परमार्थ निकेतन में रुके। शुक्रवार सुबह परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती  और डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य मेंगंगा आरती में हिस्सा लेते हुए विश्व शांति की प्रार्थना की।</span></div>
<div></div>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">वह नवरात्रि की सप्तमी तिथि के अवसर पर होने वाले हवन में श्रद्धापूर्वक सहभाग कर राष्ट्रगान में भावपूर्वक सम्मिलित हुए। स्वामी चिदानन्द ने  विश्व पोलियो दिवस पर सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि  यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि भारत जैसा विशाल जनसंख्या वाला राष्ट्र पोलियो मुक्त राष्ट्र है। यह सरकार की सतर्कता और जनता की जागरूकता से संभव हो पाया है।</span></div>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Oct 2020 16:05:15 +0530</pubDate>
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                <title>कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा के पास हथियारों की बड़ी खेप बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[कुपवाड़ा। जिले की नियंत्रण रेखा के पास किशन गंगा नदी के किनारे शनिवार को तलाशी अभियान में सुरक्षाबलों ने हथियारों की बड़ी खेप बरामद की है। चार एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 230 एके राइफल के राउंड बरामद हुए हैं। शनिवार को सुरक्षाबलों ने किशन गंगा नदी के किनारे कुछ संदिग्ध हलचल देखी। उसके बाद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/5187/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A5%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/fdyfu.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>कुपवाड़ा।</strong></span> जिले की नियंत्रण रेखा के पास किशन गंगा नदी के किनारे शनिवार को तलाशी अभियान में सुरक्षाबलों ने हथियारों की बड़ी खेप बरामद की है। चार एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 230 एके राइफल के राउंड बरामद हुए हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">शनिवार को सुरक्षाबलों ने किशन गंगा नदी के किनारे कुछ संदिग्ध हलचल देखी। उसके बाद तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सुरक्षाबलों को मौके से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। माना जा रहा है कि ये हथियार सीमा पार पाकिस्तान की ओर से आतंकियों ने टायर-ट्यूब की मदद से नदी पार भारतीय सीमा में पहुंचाए थे।</span><br />
<span style="font-size:14pt;">भारतीय सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों ने किशन गंगा के तट के उस पार दो-तीन आतंकियों की संदिग्ध हलचल देखी। जवानों को लगा की ये आतंकी रस्सी की मदद से कोई सामान नदी के इस पार भारतीय सीमा में पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। जवान तुरन्त हरकत में आ गए और पुलिस की संयुक्त टीम के साथ मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">नदी के किनारे हथियारों की बड़ी खेप बरामद हुई। चार एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 230 एके राइफल के राउंड बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों ने आतंकियों की मौजूदगी की आशंका के चलते क्षेत्र में तलाशी अभियान भी चला रखा है। खबर लिखने तक अभियान जारी था।</span></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Oct 2020 16:54:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BORDER NEWS MIRROR]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आतंकियों के शत्रु और गंगा मैया के भक्त थे प्रणब दा</title>
                                    <description><![CDATA[आर.के. सिन्हा प्रणव कुमार मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हो रही बहस के बीच यह याद रखा जाना आवश्यक है कि उन्होंने देश के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भारत के शत्रुओं की कमर तोड़ने में भी निर्णायक भूमिका अदा की थी। प्रणब कुमार मुखर्जी की हरी झंडी मिलने के बाद ही अफजल गुरु, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/4054/%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%81-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/hs-302.jpg" alt=""></a><br /><p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;font-size:14pt;"><b>आर.के. सिन्हा</b></span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">प्रणव कुमार मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हो रही बहस के बीच यह याद रखा जाना आवश्यक है कि उन्होंने देश के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भारत के शत्रुओं की कमर तोड़ने में भी निर्णायक भूमिका अदा की थी। प्रणब कुमार मुखर्जी की हरी झंडी मिलने के बाद ही अफजल गुरु, अजमल कसाब और याकूब मेमन जैसे देश के दुश्मनों को फांसी संभव हुई। राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल की अहम बात यह थी कि उन्होंने दया याचिकाओं को लेकर भरपूर सख्ती अपनाई। उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों का इस लिहाज से प्रदर्शन याद करने लायक नहीं रहा। वे तो ऐसी फाइलों पर बैठे ही रहते थे।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">बहरहाल, बात यह है कि प्रणव कुमार मुखर्जी के अवसान से देश ने ज्ञान के एक सागर को खो दिया है। वे अगर सियासत में न आते तो संवैधानिक मामलों के ख्यात विशेषज्ञ, इतिहासकार या प्रखर लेखक भी हो सकते थे। उनकी स्मरण शक्ति अद्भुत थी। उन्हें पचास-साठ साल पुरानी घटनाएं तिथियों के साथ याद रहा करती थी। वे राजनीति की दुनिया में इतनी लंबी पारी खेलने के बाद भी बेदाग रहे। उनपर कभी किसी ने कोई हल्का आरोप लगाने की हिमाकत नहीं की। इन गुणों के कारण उन्हें सब आदर देते थे। उन्हें देश ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न भी दिया।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">मुझे याद है कि मैं 1996 में अटल जी के आवास 6 रायसीना रोड पर प्रणव दा से मिला था। जब मैं 2014 में सांसद बना तब एयरपोर्ट के वीआईपी लाउन्ज में आने-जाने का अवसर मिला। एकबार मैं पटना का जहाज पकड़ने पहुंचा। प्रणव दा पहले से वहां विराजमान थे, शायद वे कोलकाता जाने की तैयारी में थे। मैं हिचककर उनसे नजर बचाकर दूर बैठने की कोशिश कर रहा था कि उन्होंने मेरा नाम लेकर पुकार लिया।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><b>देश को मिले प्रणव दा जैसा राष्ट्रपति</b></span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">देश चाहेगा कि उसे भविष्य में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रणव कुमार मुखर्जी और एपीजे कलाम सरीखे राष्ट्रपति मिलते रहें। प्रणव दा जैसी शख्सियत द्वारा राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने से देश का सम्मान तो बढ़ेगा ही। माफ करें, राष्ट्रपति पद की गरिमा को बट्टा लगना चालू हुआ राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के समय से। उन्होंने 25 और 26 जून की रात को आपातकाल के आदेश पर दस्तखत करके देश में आपातकाल लागू कर दिया था। अगली सुबह समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा जी की आवाज में संदेश सुना कि, “भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है। इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है।” लेकिन सच तो इंदिरा की घोषणा से ठीक उलटा था। देशभर में हो रही गिरफ्तारियों के साथ आतंक का दौर पिछली रात से ही शुरू हो गया था। फखरुद्दीन अली अहमद जैसे औसत इंसान को कांग्रेस ने राष्ट्रपति भवन भेजकर देश के साथ अन्याय किया। उसके बाद कांग्रेस वी.वी.गिरी, ज्ञानी जैल सिंह, आर. वेंकटरामण, प्रतिभा पाटिल जैसों को राष्ट्रपति भवन भेजती रही। कहने की आवश्यकता नहीं कि इन सबका कार्यकाल बेहद औसत रहा। ये सभी अच्छे इंसान थे लेकिन राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुकूल थे या नहीं, इसपर इतिहास में बहस चलती रहेगी। पर देश को एपीजे अब्दुल कलाम के रूप में महान राष्ट्रपति मिला। वे मृत्यु के बाद भी अमर हो गए। देश का बच्चा-बच्चा उन्हें मिसाइल मैन कहकर पुकारता है।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><b>विद्वता की प्रतिमूर्ति</b></span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">प्रणव कुमार मुखर्जी का राष्ट्रपति पद का कार्यकाल निर्विवाद रूप से उत्तम रहा। सारा देश उनकी विद्वता का कायल रहा। प्रणव कुमार मुखर्जी धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान थे। वे प्रत्येक शारदीय नवरात्रि के समय अपने पैतृक गांव में माँ दुर्गा के पूजन के लिए जाते रहे हैं। जहाँ वे सभी धार्मिक अनुष्ठान पारंपरिक पहनावे में ही सम्पन्न करते थे। उनकी धार्मिक आस्था को देश ने उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘The Coalition Years’ में पढ़ा। उन्होंने काँची के पूजनीय ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती जी की गिरफ्तारी के दौरान केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रतिरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि “क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना सिर्फ हिन्दू संत-महात्माओं तक ही सीमित है? क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखा सकती है?” काँची शंकराचार्य पूज्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी के जेल से वापस आने के बाद प्रणव दा ने राष्ट्रपति रहते हुए काँची मठ में तीन दिनों का प्रवास किया।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><b>गंगा की अविरलता पर अद्वितीय निर्णय</b></span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">संभव है कि बहुत लोगों को ज्ञात न हो कि प्रणव कुमार मुखर्जी ने गंगा की अविरलता पर अद्वितीय निर्णय लिया था। संतों से जो उन्होंने कहा, वह अपने आपमें उनकी आस्था का प्रमाण है। प्रणव कुमार मुखर्जी के सामने गंगा जी की अविरलता का विषय अगस्त 2010 में तब आया जब लोहारी-नागपाला बाँध के खिलाफ आमरण अनशन चल रहा था। उस समय वे इस विषय पर निर्णायक मंत्री समूह के अध्यक्ष थे। उनसे मिलने संतों का एक प्रतिनिधिमंडल 11 अगस्त 2010 को जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी एवं जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी के नेतृत्व में उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँचा था। अगस्त का महीना होने के कारण भीषण बारिश हो रही थी, जिससे दिल्ली के कई इलाकों में घुटने तक जलभराव हो गया था। जब संतों का प्रतिनिधिमंडल रात्रि में 10 बजे के उनके सरकारी आवास पहुँचा तो वह स्वयं भी नंगे पाँव लगभग घुटने तक पानी में हाथ में छाता लिए स्वागत के लिए बाहर खड़े थे। वे कंधे का सहारा देकर पूज्य शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी को अपने आवास के अंदर ले गये। उस प्रतिनिधिमंडल में गंगा महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष श्री प्रेमस्वरूप पाठक जी, राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती जी (उस समय आचार्य जीतेंद्र), प्रख्यात अर्थशास्त्री श्री भरत झुनझुनवाला, हरिद्वार से सतपाल ब्रह्मचारी जी, चेतनज्योति मठ के महंत स्वामी ऋषिश्वरानंद जी, श्री के एन गोविंदाचार्य जी थे।</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">जगद्गुरु जी ने प्रणब दा को बताया कि “हमने सुना है कि लोहारी-नागपाला बाँध पर अबतक लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इसी वजह से सरकार बाँध रद्द नहीं करना चाहती है। क्या बाँध का महत्व गंगा जी की अविरलता से बढ़कर है? मैं आपको कहता हूँ कि अगर पैसे की वजह से गंगा जी को बाँधने का कार्य नहीं रुक सकता तो आप हम संतों को अपने यहां बंधक रख लीजिये। जब हिन्दू समाज बाँध का 600 करोड़ सरकार को चुका देगा तब आप हमें छोड़ दीजिएगा।”</span></p>
<p style="font-weight:400;text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">इसपर प्रणब दा भावुक हो गए। उन्होंने कहा “पूज्य संत मेरे दरवाजे पधारे, यह मेरे लिए सौभाग्य का विषय है। गंगाजी की अविरलता के लिए 600 करोड़ रुपये का मेरे लिए कोई मायने नहीं है। सरकार संतों की भावनाओं के अनुरूप ही निर्णय लेगी।” इस प्रकार प्रणब दादा के निर्णय ने गंगा जी के वक्षस्थल पर एक और घाव होने से बचा लिया था। तो कृतज्ञ देश याद रखेगा ही ऐसे महान प्रणव कुमार मुखर्जी को।</span></p>
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2020 17:08:22 +0530</pubDate>
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                <title>गंगा तट पर अज्ञात युवक का शव बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[बक्सर सिमरी थाना के केशोपुर गांव के निकट गंगा तट से एक तीस वर्षीय अज्ञात युवक का शव लोगो की सूचना पर पुलिस ने सोमवार को बरामद किया।   ग्रामीणों ने बताया की आज अनंत चतुर्दशी ब्रत को लेकर लोग गंगा स्नान हेतु गये थे |इसी दौरान लोगो की नजर लाश को नोच खसोट रहे कुत्तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/3974/%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A4%9F-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%95"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/kjnnh.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>बक्सर</strong> </span>सिमरी थाना के केशोपुर गांव के निकट गंगा तट से एक तीस वर्षीय अज्ञात युवक का शव लोगो की सूचना पर पुलिस ने सोमवार को बरामद किया। </span></p>
<div style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"> ग्रामीणों ने बताया की आज अनंत चतुर्दशी ब्रत को लेकर लोग गंगा स्नान हेतु गये थे |इसी दौरान लोगो की नजर लाश को नोच खसोट रहे कुत्तो पर पड़ी |जिसकी तत्काल सूचना पुलिस को दी गई |समाचार भेजे जाने तक शव की शिनाक्त नही हो पाई है |पुलिस मामले की जांच कर रही है |सम्भावना है की बाढ़ के दौरान लाश कही अन्यत्र से बह कर तट पर आगई  हो |</span></div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2020 16:35:28 +0530</pubDate>
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                <title>गंगा और बूढ़ी गंडक नदी में पानी का उफान थमा</title>
                                    <description><![CDATA[खगड़िया। खगड़िया जिले के बाढ़ पीड़ितों की मनुहार का गंगा और बूढ़ी गंडक नदियों पर थोड़ा असर हुआ है। शनिवार को गंगा और बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में स्थिरता दिखाई दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निगाहें प्रमुख चार नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। शनिवार की सुबह कोसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/3594/%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/32d43465d6224bb923489252381bbf91da44fe02e32086f362b1d51f1a667ad5_1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>खगड़िया।</strong></span> खगड़िया जिले के बाढ़ पीड़ितों की मनुहार का गंगा और बूढ़ी गंडक नदियों पर थोड़ा असर हुआ है। शनिवार को गंगा और बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में स्थिरता दिखाई दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निगाहें प्रमुख चार नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। शनिवार की सुबह कोसी और बागमती नदियां शांत नजर आईं वहीं गंगा और बूढ़ी गंडक नदी ने भी लोगों की मनुहार सुनकर रहम खाना शुरू कर दिया है। गंगा और बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर मामूली बढ़त के साथ स्थिर हो गया है। गंगा नदी एक दिन में 0.3 मीटर बढ़कर खतरे के निशान से 0.55 मीटर ऊपर पहुंच गई है, जबकि बूढ़ी गंडक नदी 0.3 मीटर बढ़कर खतरे के निशान से 0.71 मीटर ऊपर स्थिर हो गई है। गंगा नदी का खतरे का निशान 34.7 मीटर है, जबकि बूढ़ी गंडक नदी का खतरे का निशान 36.60 मीटर है। कोसी और बागमती नदियां निरंतर घट रही हैं हालांकि अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1.48 मीटर ऊपर दर्ज किया गया जो एक दिन में 0 .07 मीटर कम हुआ है। जबकि बागमती नदी बीते एक दिन में 0.04 मीटर कम हुआ है। वर्तमान में कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1.48 मीटर तथा बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.22 मीटर ऊपर बह रही है। कोसी नदी का खतरे का निशान 33.85 मीटर और बागमती नदी का खतरे का जलस्तर 35.63 मीटर है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले के सभी सात अंचल बाढ़ प्रभावित हैं। जिले की 129 पंचायतों में से 41 पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि जिले के 367 गांव में से 135 गांवों के डेढ़ लाख लोग बाढ प्रभावित भी हैं। जिला प्रशासन 6 सामुदायिक रसोई चला रहा है जहां एक लाख से अधिक लोग भोजन प्राप्त करते हैं । इस बीच सदर अंचल के रहीमपुर स्थित तीन पंचायतों के लोग गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित होने की घोषणा करने की मांग जिला प्रशासन से कर रहे हैं। बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के समय से खगरिया शहरी क्षेत्र के कुछ इलाकों में सीपेज का पानी आ गया था जिसे पंपसेट लगाकर वापस नदी की मुख्यधारा में डाला जा रहा है। कमरिया बस स्टैंड के समीप स्थित वार्ड नंबर 26 के गरीब परिवारों के लोगों ने प्रशासन से आवागमन के लिए नाव और राहत सामग्री देने की मांग की है। वार्ड पार्षद शिवराज यादव ने बताया कि नगर परिषद की ओर से भी प्रभावितों को यथासंभव राहत उपलब्ध कराया जाएगा।</span></p>
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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2020 19:48:20 +0530</pubDate>
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                <title>गंगा और बूढ़ी गंडक नदी में उफान, अपनी दहलीज में लौट रही कोसी और बागमती</title>
                                    <description><![CDATA[खगड़िया। खगड़िया जिले के सभी सात अंचलों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निगाहें प्रमुख चार नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई हैंं। शुक्रवार की सुबह कोसी और बागमती नदियां शांत होकर लोगों को अपना आशीर्वाद देती नजर आईंं वहीं गंगा और बूढ़ी गंडक नदी अपनी दहलीज लांघ कर लोगों के दिलों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/3526/%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/c00a5f073783dd8d0cce7a8f092c1a51a2925b6c7a4a0ad5e981393929377a10_1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;"><span style="color:#ff0000;"><strong>खगड़िया।</strong></span> खगड़िया जिले के सभी सात अंचलों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निगाहें प्रमुख चार नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई हैंं। शुक्रवार की सुबह कोसी और बागमती नदियां शांत होकर लोगों को अपना आशीर्वाद देती नजर आईंं वहीं गंगा और बूढ़ी गंडक नदी अपनी दहलीज लांघ कर लोगों के दिलों को दहला रही हैंं। गंगा और बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा नदी का जलस्तर एक दिन में 0.6 मीटर बढ़कर खतरे के निशान से 0.52 मीटर ऊपर पहुंच गया है जबकि बूढ़ी गंडक नदी 0.3 मीटर बढ़कर खतरे के निशान से 0.71 मीटर ऊपर बह रही है। गंगा नदी का खतरे का निशान 34.7 मीटर है जबकि बूढ़ी गंडक नदी का खतरे का निशान 36.60 मीटर है। कोसी और बागमती नदियोंं में   पानी निरंतर घट रहा हैं। हालांकि अभी भी दोनों खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैंं। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर दर्ज किया गया जो एक दिन में 0 .10 मीटर कम हुआ है।  बागमती नदी का जलस्तर बीते एक दिन में 0.11 मीटर कम हुआ है। वर्तमान में कोसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1.55 मीटर तथा बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.26 मीटर ऊपर  है। कोसी नदी का खतरे का निशान 33.85 मीटर और बागमती नदी का खतरे का जलस्तर 35.63 मीटर है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार जिले के सभी सात अंचल बाढ़ प्रभावित हैं। जिले की 129 पंचायतों में से 41 पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैंं। जिला प्रशासन का कहना है कि जिले के 367 गांवोंं में से 135 गांव के डेढ़ लाख लोग बाढ़ प्रभावित भी हैंं। जिला प्रशासन 6 सामुदायिक रसोई चला रहा है जहां एक लाख से अधिक लोग भोजन प्राप्त करते हैं । इसके अलावा 2674 फूड पैकेट का भी वितरण करने का दावा जिला प्रशासन ने किया है।</span></p>
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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2020 20:11:34 +0530</pubDate>
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