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                <title>indo-nepalborder dispute - BORDER NEWS MIRROR</title>
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                <description>indo-nepalborder dispute RSS Feed</description>
                
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                <title>घोड़ासहन में पकड़ी पिकअप पर विवाद — पुलिस बोली, वैध बिल पर हो रहा था व्यवसाय&quot;,</title>
                                    <description><![CDATA[<p><img src="https://bordernewsmirror.com/media/2026-01/img-20260110-wa0022.jpg" alt="IMG-20260110-WA0022" width="899" height="1200" /></p>
<p>  </p>
<p><strong>सागर सूरज</strong></p>
<p>मोतिहारी l भारत-नेपाल सीमा से सटे घोड़ासहन थाना क्षेत्र में चाइनीज लहसुन से लदी एक पिकअप पर मचा बवाल अब नए मोड़ पर है।</p>
<p>  पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर सीकरहना अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी उदय शंकर ने सफाई दी है।</p>
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<p>डीएसपी उदय शंकर के अनुसार, पिकअप वाहन वैध जीएसटी बिल और व्यवसायिक दस्तावेज के साथ चल रहा था। जांच में यह पाया गया कि वाहन में लहसुन व्यवसाय के लिए लाई जा रही थी, न कि तस्करी कर । </p>
<p><img src="https://bordernewsmirror.com/media/2026-01/img-20260109-wa0112.jpg" alt="IMG-20260109-WA0112" width="1200" height="1140" /><br />कुछ स्थानीय तत्वों ने वाहन को बीच रास्ते में रोककर पुलिस और मीडिया को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/16593/dispute-over-pickup-caught-in-ghoda-sahan-police-said"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2026-01/img-20260109-wa0113.jpg" alt=""></a><br /><p><img src="https://bordernewsmirror.com/media/2026-01/img-20260110-wa0022.jpg" alt="IMG-20260110-WA0022" width="899" height="1599"></img></p>
<p> </p>
<p><strong>सागर सूरज</strong></p>
<p>मोतिहारी l भारत-नेपाल सीमा से सटे घोड़ासहन थाना क्षेत्र में चाइनीज लहसुन से लदी एक पिकअप पर मचा बवाल अब नए मोड़ पर है।</p>
<p> पुलिस पर लगाए गए आरोपों पर सीकरहना अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी उदय शंकर ने सफाई दी है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid69d788b584be4 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">
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</div></div>
<p>डीएसपी उदय शंकर के अनुसार, पिकअप वाहन वैध जीएसटी बिल और व्यवसायिक दस्तावेज के साथ चल रहा था। जांच में यह पाया गया कि वाहन में लहसुन व्यवसाय के लिए लाई जा रही थी, न कि तस्करी कर । </p>
<p><img src="https://bordernewsmirror.com/media/2026-01/img-20260109-wa0112.jpg" alt="IMG-20260109-WA0112" width="1280" height="1140"></img><br />कुछ स्थानीय तत्वों ने वाहन को बीच रास्ते में रोककर पुलिस और मीडिया को फोन किया, जिससे मामला अनावश्यक रूप से सनसनीखेज़ बन गया।</p>
<p>डीएसपी ने कहा — “पुलिस ने मौके पर ही बिल की जांच कर वाहन को छोड़ दिया था। लेन-देन या रिश्वत की बातें बिल्कुल निराधार हैं। पुलिस ने नियमों के मुताबिक कार्यवाही की है। </p>
<p></p><div class="pbwidget wid69d788b586ed0 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">

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</div></div>
<p>ऐसे मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से रंगदारी प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है।</p>
<p><img src="https://bordernewsmirror.com/media/2026-01/img-20260109-wa0113.jpg" alt="IMG-20260109-WA0113" width="1078" height="590"></img></p>
<p>” ग्रामीणों के अनुसार, कुछ स्थानीय लोग व्यावसायिक गतिविधियों में रंगदारी की नीयत से व्यवधान डाल रहे हैं, जिससे व्यापारी वर्ग में भय का माहौल बनता है।</p>
<p>हालांकि, सूत्रों के मुताबिक पुलिस द्वारा प्रस्तुत जीएसटी बिल की वैधता पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। </p>
<p>उपलब्ध बिल गौरी गणेश ट्रेडर्स, घोड़ासहन ने काटा है, जबकि चालान सूरज सुपर मार्किट, खरसलवा, कवईया को काटा गया है — जो नेपाल सीमा से सटा हुआ गांव मे अवस्थीत है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid69d788b5870e3 htmlwidget"><div class="pbwidget-body">

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</div></div>
<p>व्यापार जानकारों का कहना है कि यदि लहसुन वास्तव में चीनी मूल का है, तो कारोबारी के पास चीन या नेपाल से आयात का फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट और भन्सार दस्तावेज़ होना चाहिए। सिर्फ स्थानीय जीएसटी बिल के आधार पर वस्तु छोड़ना जाँचनीय पहलू है।</p>
<p>जानकारों का यह भी कहना है कि यह वही पुराना मॉडस ऑपरेण्डी है — जहां तस्कर रात के अंधेरे में नेपाल मार्ग से चीनी लहसुन भारत लाते हैं, और पकड़े जाने पर स्थानीय फर्मों के बिल दिखाकर वैध व्यापार का रूप दे देते हैं।</p>
<p>पुलिस की दलील है कि जब तक किसी प्रोडक्ट का बिल और टैक्स दस्तावेज़ वैध दिखते हैं, तब तक कार्रवाई करना कानूनी रूप से कठिन होता है। </p>
<p>इस वजह से पुलिस कई बार सीमित अधिकार के चलते ऐसी ट्रकों को छोड़ने को बाध्य होती है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid69d788b58737a htmlwidget"><div class="pbwidget-body">
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</div></div>
<p>बावजूद इसके, वर्तमान प्रकरण में सवाल यह उठता है कि क्या उपलब्ध दस्तावेज़ों की गहन जांच की गई थी या नहीं।</p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि सच्चाई स्पष्ट करने के लिए भन्सार विभाग, एसएसबी और कृषि विभाग की संयुक्त जांच आवश्यक है। </p>
<p>तभी यह साबित होगा कि यह वैध व्यापार था या सीमा पार तस्करी का नया तरीका। वैसे बीएनम भी अपने स्तर से मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को सामने लाने क़ा प्रयास कर रही है।</p>
<p></p><div class="pbwidget wid69d788b58844b slideshow"><div class="pbwidget-body"><div class="carousel slide">
  
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                                                            <category>Bihar</category>
                                            <category>East Champaran </category>
                                    

                <link>https://bordernewsmirror.com/article/16593/dispute-over-pickup-caught-in-ghoda-sahan-police-said</link>
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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 13:10:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[SAGAR SURAJ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से भारत का गुलाम</title>
                                    <description><![CDATA[सागर सूरज नेपाल इन दिनों सुर्ख़ियों में है। ऐसा नहीं की नेपाल विगत कुछ वर्षो में अपनी आत्म निर्भरता के क्षेत्र में या विज्ञानं के क्षेत्र में कोई बड़ा या छोटा कार्य कर लिया है या  फिर नेपाल में कुछ ऐसा बड़ा परिवर्तन हो गया जिससे इस हिमालयन देश की अहमियत अपने पडोशी मुल्कों की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/2616/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/hhhhhhf-वीईसी.png" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong>सागर सूरज</strong></span></p>
<p>नेपाल इन दिनों सुर्ख़ियों में है। ऐसा नहीं की नेपाल विगत कुछ वर्षो में अपनी आत्म निर्भरता के क्षेत्र में या विज्ञानं के क्षेत्र में कोई बड़ा या छोटा कार्य कर लिया है या  फिर नेपाल में कुछ ऐसा बड़ा परिवर्तन हो गया जिससे इस हिमालयन देश की अहमियत अपने पडोशी मुल्कों की नजर कुछ बढ़ गयी हो। हाल के दिनों में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली के बडबोलेपन एवं छद्म राष्ट्रवाद से उपजे भारत के साथ जमीनी विवाद के कारण भारत-नेपाल के संबंध (indo-nepal relation) अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><em><span style="font-size:18pt;"><strong>भारतीय मीडिया भी दोषी</strong></span></em></span></p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कुछ मीडिया घरानों के साथ-साथ नेपाल की मीडिया ने तो दोनों देशों के सदियों पूर्व संबंधों में पलीता ही लगाने का कार्य किया। नेपाली प्रधानमंत्री ने तो हिन्दुओं के भगवान श्रीरामचन्द्र को ही नेपाली बता दिया साथ ही अयोध्या को नेपाल के बीरगंज के पास होने का दावा तक कर दिया। भारतीय मीडिया भी कहा कम था। नेपाली प्रधानमंत्री और चाइना के एक राजदूत को लेकर कई तरह के सनसनीखेज खुलासे करने शरू कर दिए। इन सब के बाद भी भारत के प्रधानमंत्री एवं अन्य सरकार के लोगों ने नेपाल के मामले में अपनी गंभीरता भंग नहीं होने दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर आंठ्वी पास ओली (KP OLI)भारत विरोध में इतने आगे बढ़ गये की एक तरफ खुद इतिहासविद बन हिन्दू आस्था पर अतिक्रमण करते हुए श्री राम के इतिहास पर ही सवालिया निशान लगा कर अपने ही देश के करोड़ों हिन्दुओं को हत्प्रब्द कर दिया, वही चिकित्सक बन बैश्विक महामारी करोना को भारत से आया वायरस बता उसका इलाज भी बता रहे है। नेपाली जनता भी ऐसे बेतुके बयानों का ना केवल समर्थन कर रही है बल्कि इसके बहाने पानी पी-पी कर भारत को बुरा भला कह रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन आश्चर्य तो ये है कि उनके भारत विरोध के प्रदर्शन में भारतीय गाने बजते है। उनके घरों में भारतीय फिल्मों के हीरो-हेरोइन के पिक्चर लगे होते है। घर में जिस सोफे पर बैठते है वे भारत से आयातित होते है यही नहीं कृषि प्रधान देश होने के बाद भी नेपाल धान, गेहूं भी भारत से ही आयात करता है। विकास की हालत यह कि जिस खुकुरी पर वे आज भी दंभ भरते है उसका लोहा भारत से ही नेपाल जाता है। ये अलग बात है कि विश्व के सबसे कमजोर देश से भी नेपाल अगर युद्ध करे तो नेपाल उनके लड़कुं विमानों, मिसायलों के सामने अपना प्राचीन हथियार खुकुरी ही चमकायेगा। पहाड़ों, नदियों और नालों वाला देश नेपाल अब इतना दिग्भ्रमित हो गया है कि दिन-रात भारत अलग-अलग तरीके से भारत को उक्सा रहा है।  नेपाल सरकार के एक आंकडे पर अगर भरोसा करे तो नेपालियों ने गत वर्ष 2.65 अरब रुपये का बकरी का मांस खाया, भेड़ का मांस 1.75 करोड़ रुपये और भारत से आयातित 1.77 करोड़ रुपये का मटन भी खाया। अपने भोजन सामग्रियों के लिय नेपालियों ने करीब 27 अरब का तेल भारत से आयात किया ।</p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;"><em><strong><span style="font-size:18pt;">नेपाल भारत का आर्थिक एवं सांस्कृतिक दास</span></strong></em></span></p>
<p style="text-align:justify;">4.85 बिलियन रुपये का प्याज, 300 मिलियन रुपये का मेमना, 430 मिलियन रुपये का नींबू, 610 मिलियन का लहसुन, 80 करोड़ रुपये का अदरक, 167.6 मिलियन रुपये की हल्दी और 171.3 मिलियन की कीमत की ज़ुकीनी भारत से आयात करनी पड़ी। लगभग 22 बिलियन आयातित शराब को नेपालियों ने पिया। नेपालियों द्वारा 135.3 मिलियन रुपये के आयातित कंडोम का उपयोग किया गया। नेपाल में 1.5 बिलियन रुपये के मसाले और 110 मिलियन रुपये मूल्य के फूलों का भारत से आयात किया गया। अपने बच्चों के लिए 4.66 अरब रुपये के आयातित भोजन और दूध को भारत से आयात किया। त्यौहार के दौरान जौ, मसाले 1.46 अरब रुपये और 615.5 करोड़ रुपये के दीपक आयात किए जाते हैं। दाह संस्कार के लिए भारत से आयातित लगभग 1 अरब रुपये की अगरबत्ती का भी उपयोग नेपाली कर रहे हैं। इस तरह अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक एक नेपाली भारत पर निर्भर है।(NEPAL-INDIA CULTURAL RELATION)</p>
<p><em><strong><span style="font-size:18pt;color:#ff0000;"> नेपाल कहाँ है ?</span></strong></em></p>
<p style="text-align:justify;"> दशरथ पुत्र राम की पत्नी बैदेही सीता बिहार के पूर्वी चंपारण के सीतामढ़ी के पुनौरा गाँव के एक खेत से जन्मी थी। सीता का जन्म राजा जनक के तत्कालीन मिथिला क्षेत्र के पुनौरा गाँव में होने से जनक की पुत्री कहलाई। यानी सीता भी नेपाली नहीं थी। श्रीराम के जन्म के समय नेपाल नाम के किसी देश का अस्तित्व भी नहीं था। नेपाल भारत का आर्थिक एवं सांस्कृतिक दास है जो कभी गुलाम नहीं होने का दंभ भरता है। नेपाल एक ऐसा ह्युम पाइप की तरह है जिसमे आधा भारत तो आधा चाइना बैठा हुआ है फिर नेपाल कहाँ है ।  (QUESTION ON NEPAL HISTORY)</p>
<p>सच तो ये है कि नेपाल के शाह डायनेस्टी जहाँ भारत के राजस्थान से माइग्रेट कर पहाड़ों में गोरखा सामाज्य की स्थापना की वही नेपाल के सभी बड़े नेता चाहे पुष्प कमल दहाल प्रचंड हो या खुद के पी ओली की रूट भारत से जुड़े है। ऐसा हर एक नेपाली के साथ है फिर ऐसी नफरत का कारण क्या है। जाहिर है ओली ने अपने गिरते जनाधार पर छद्म राष्ट्रवाद का मरहम लगाने का प्रयास किया है। विकास की बातों से दूर विदेशी रुपयों के बल नेपाल की नैया वर्षो से चल रही है।  भारत और चाइना दोनों के भरोसे टिका नेपाल का सारा इंफ्रास्ट्रक्चर कब भर-भरा कर गिर जाये कहा नहीं जा सकता।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Opinion</category>
                                            <category>International</category>
                                    

                <link>https://bordernewsmirror.com/article/2616/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA</link>
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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2020 19:15:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[BORDER NEWS MIRROR]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल के रास्ते बिहार में आधा दर्जन आतंकियों ने की घुसपैठ</title>
                                    <description><![CDATA[राकेश कुमार मोतिहारी। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशोँ से तनातनी के बीच पड़ोसी देश नेपाल के रास्ते छह पाकिस्तानी आतंकियों के बिहार में करने की सूचना ने बिहार सरकार के साथ केंद्रीय ख़ुफ़िया व सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। बिहार पुलिस की विशेष शाखा ने भारत-नेपाल सीमा के रास्ते जैश-ए-मोहम्मद के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/2377/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/motihari.png" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong><span style="font-size:14pt;">राकेश कुमार </span></strong></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:14pt;">मोतिहारी। चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशोँ से तनातनी के बीच पड़ोसी देश नेपाल के रास्ते छह पाकिस्तानी आतंकियों के बिहार में करने की सूचना ने बिहार सरकार के साथ केंद्रीय ख़ुफ़िया व सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है। बिहार पुलिस की विशेष शाखा ने भारत-नेपाल सीमा के रास्ते जैश-ए-मोहम्मद के छह खूंखार आतंकियों के बिहार में घुसपैठ करने की जानकारी साझा की है। विशेष शाखा ने इसे लेकर रविवार को अलर्ट भी जारी किया है। बताया जा रहा है कि आतंकी भारत-नेपाल सीमा के रास्ते बिहार में घुसने में कामयाब हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों केन्द्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने बिहार पुलिस को अलर्ट किया था कि बिहार-नेपाल सीमा से कुख्यात पाकिस्तानी आतंकी घुसपैठ कर सकते हैं। इसके बाद बिहार-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई थी। पाकिस्तानी सेना से प्रशिक्षित खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आधा दर्जन आतंकियों के बिहार में घुसने की सूचना से उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में हड़कंप मच गया है। पुलिस की स्पेशल ब्रांच के एसपी ने मोतिहारी एसपी नविन चंद्र झा, समेत अन्य जिलों के एसपी एसएसपी, को इस आशय का पत्र लिखकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये हैं। बताया गया है कि बीते 15 दिनों में नेपाल की सीमा के रास्ते बिहार में तकरीबन आधा दर्जन आतंकियों ने घुसपैठ की है। इन आतंकियों के निशाने पर राज्य के बड़े राजनेता के साथ-साथ देश के कई अन्य प्रमुख शहर भी हैं। सनद रहे कि भारत नेपाल की सीमाएं खुली क्षेत्र होने के कारण आतंकी गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है पूर्व में सीमाई क्षेत्र के एक गांव से कुख्यात आतंकी यासीन भटकल व टूड़ा को मोतिहारी पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया था, यही नही कानपूर ट्रेन ब्लास्ट के तार भी पूर्वी चम्पारण के इलाके से ही जुड़े हुए थे जिस घटना में 50 यात्रियों की मौत हो गई थी घटना में आइएसआई से संलग्न कई लोगों को सीमाई इलाकों से गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2013 में पीएम नरेंद्र मोदी की गांधी मैदान में हुई रैली के दौरान भी आतंकियों ने बम विस्फोट किये थे। प्रमुख पर्यटन स्थल बोधगया भी आतंकियों के हमले से अछूता नहीं रहा है।</span></p>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2020 00:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>गोरखा रेजिमेंट्स से कम नहीं बिहार रेजिमेंट, बिना हथियार के 60 से अधिक चीनियों को धोया</title>
                                    <description><![CDATA[सागर सूरज मोतिहारी: भारत और चीन दोनों ही देशों की सेना गलवान घाटी में आमने-सामने है। चीन के धोखा के बाद भारत ने चाइना के साथ बॉर्डर के कुछ इलाकों में बिना हथियार के गस्त करने वाली समझौते को ख़त्म करते हुये अपनी सेना को परिस्थितियों के हिसाब से सीमा पर चाइना का जवाब देने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/2232/%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/face.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff0000;"><strong>सागर सूरज</strong></span></p> <p style="text-align:justify;">मोतिहारी: भारत और चीन दोनों ही देशों की सेना गलवान घाटी में आमने-सामने है। चीन के धोखा के बाद भारत ने चाइना के साथ बॉर्डर के कुछ इलाकों में बिना हथियार के गस्त करने वाली समझौते को ख़त्म करते हुये अपनी सेना को परिस्थितियों के हिसाब से सीमा पर चाइना का जवाब देने का आदेश दे दिया गया है साथ ही लेह को एयर डिफेन्स सिस्टम से लैश कर दिया गया है ताकि ड्रैगन के किसी हिमाकत को भारतीय सेना बेहतर जवाब दे सके।</p> <p style="text-align:justify;">इधर 16 जून को गलवान में बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों की मौत और चीन सरकार द्वारा अपने मृत्य एवं घायलों की संख्या बताने से लगातार टल्ली देने के कारण चीन में घमासान मचा हुआ है। चीनी समाचार पत्रों के अनुसार भारत अपने सैनिकों को राष्ट्रीय सम्मान दे रही है वही चीनी सरकार अपने शहीदों के घर सिर्फ अस्थि कलश भेज कर अपनी जिम्मेवारियों की इतिश्री कर ले रही है। चीनी ट्विटर हैण्डलेर्स बिहार रेजिमेंट की गुणगान कर रहे है वही चीनी सरकार को अगाह कर रही है कि वो भारतीय सेना से ना लाडे। सवालों के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे सेना सम्बंधित कोई डाटा नहीं दे सकते। ब्रिटिश मीडिया ने तो भारतीय सेना को स्लाउटर तक कहते हुये बताया कि 40 से ऊपर चीनी सेना को बिहार रेजिमेंट के जवानों ने गर्दन मरोड-मरोड़ कर मार डाला।</p> <p style="text-align:justify;">सामाजिक एवं आर्थिक मामलों के जानकार हैरी चेन ने अपने हैरी चेन पीएचडी नामक ट्विटर एकाउंट पर लिखा है कि सरकार में उनके सूत्रों ने 63 चीनी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि की है, जबकि एक फ़ोलोवर ने कहा है कि यह संख्या 150 से ज्यादा है।</p> <p style="text-align:justify;">चीन सरकार सिर्फ ये कह रहा है कि उनके भी सैनिक हताहत है, लेकिन भारत से ज्यादा डेथ बताने में उसे शर्म आ रही है। उसे अपनी किरकिरी का भय है। चीनियों ने कहा कि चीन की थल सेना भारतीय सेना के सामने बहुत की कमजोर है।<br /> घटना के तुरंत बाद से चीन के विदेश मंत्री मामले को बैठ कर सुलझाने के लगातार बयान देने लगे क्योकि बॉर्डर पर भारतीय तैयारियों से चीन दहशत में है। एजेंसी की खबरों को अगर माने तो चीनियों ने एक ऑफिसर सहित निहत्ते तीन भारतीय जवानों को शहीद कर दिया जबकि बाकि 17 जवान पहाड़ों से नदी में गिर कर ठण्ड से शहीद हुये थे ।</p> <p><img class="alignnone size-full wp-image-12845" src="https://bordernewsmirror.com/media/2021-12/face1.jpg" alt="" width="576" height="647"></img></p> <p style="text-align:justify;"><a href="https://twitter.com/PhdParody/status/1273091980617269256?s=20">https://twitter.com/PhdParody/status/1273091980617269256?s=20</a><br /> चीन सरकार का मुख्य पत्र ग्लोबल टाइम्स तो अपने हताहत लोगों पर बात ही नहीं कर रहा, जबकि चीनी मीडिया धीरे-धीरे चीनी सैनिकों के मारे जाने के मामले में सामने आ रही है। उनमे से वे कुछ चीन के 5 सैनिकों के मरने और 11 के घायल होने का भी आकड़ा पेश कर रहे है।</p> <p style="text-align:justify;"><span style="font-family:helvetica, arial, sans-serif;"><strong>चीन के समाचार पत्रों ने लिखा हम भारत से यूद्ध हार गये। एक चीनी नागरिक वांग चुंग अपने फेस बुक पोस्ट पर लिखा है</strong><strong>, </strong><strong>हमें मालूम नहीं इंडिया में बिहार कहा है परन्तु बिहारी आर्मी ने हमारे </strong><strong>30 </strong><strong>से अधिक सेना को मार दिया है। पूछा</strong><strong>, “</strong><strong>भारत की सेना इतनी बहादुर क्यों है</strong><strong>’</strong>। चीनियों ने कहा हम अब युद्ध नहीं चाहते।</span></p> <p style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;"><strong><span style="font-size:18pt;">गलवान में चीनियों से भयानक बदला, पाकिस्तान एवं नेपाल के लिय भी बड़ी सबक</span></strong></span></p> <p style="text-align:justify;"> </p><p style="text-align:justify;">बिहार के मोतिहारी के रहने वाले डिफेंस विशेषज्ञ अम्बर कुमार ने कहा कि गोरखा सेना का शौर्य 1990 के कारगिल युद्ध में देखने को मिला था, इसके अलावा एंग्लो-सिख वार, 1971 का पाकिस्तान-भारत का युद्ध एवं अफगान वार में गोरखा रेजिमेंट्स ने अपने शौर्य का परिचय दिया, लेकिन 16 बिहार रेजिमेंट्स ने बिना हथियार के चीनी सैनिकों को जो सबक सिखाया है उसे इतिहास याद रखेगा। ख़ास बात ये थी कि गलवान घाटी में परंपरागत हथियारों से लैश चीनी सैनिक निहत्थे भारतीय सेना पर हमला कर एक कमांडर सहित अन्य भारतीय सैनिकों के मौत के कारण बने। बदले की कार्रवाई में बिहार रेजिमेंट ने बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के गर्दन अलग कर डाले एवं पत्थरों पर पटक-पटक कर मार डाले गए।</p> <p><img class="alignnone size-full wp-image-12861" src="https://bordernewsmirror.com/media/2021-12/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-2.jpg" alt="" width="719" height="350"></img></p> <p style="text-align:justify;">रोहित ने कहा चीनी सैनिकों की छोटी उचाई एवं भारतीय सेना की तुलना में चीन की शारीरिक अक्षमता चीन की इस लड़ाई में दुर्गति का कारण बना, साथ ही इस झड़प ने बिहार रेजिमेंट के शौर्य को गोरखा रेजिमेंट के समक्ष ला कर खड़ा कर दिया। अम्बर ने चुटकी लेते हुये कहा कि वैसे भी बिहार में कुश्ती यहाँ के गांवों का महत्वपूर्ण खेल है। बिहारी जवानों को गलवान में यह खेल खेलने का पुरा मौका मिला।</p> <p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:14pt;">अम्बर ने कहा कि चीन को गलवान घाटी में दी गयी सबक नेपाल एवं पाकिस्तान के उन तत्वों के लिये भी एक बड़ा सबक है जो भारत के शांति से रहने के सिद्धांतों का पुरा फ़ायदा उठा रहे है।</span></strong></p> <p style="text-align:justify;">नेपाल के ऐसे तत्वों को समझना चाहिय कि इस आधुनिक दौर में खुकुरी जैसे हथियारों की बात करना हास्यास्पद है। लड़ाई लड़ने के लिए भारतीय जवानों वाली लम्बाई और ताकत के साथ ही राफेल एवं जैगुआर जैसे खतरनाक आधुनिक हथियारों की भी जरुरत है। वैसे नेपाल को भारत अपना अब तक दोस्त ही समझता है।      <img class="alignnone size-full wp-image-12862" src="https://bordernewsmirror.com/media/2021-12/untitled7.png" alt="" width="785" height="360"></img></p> <p style="text-align:justify;">इधर जून 22 को एजेंसी के खबरों के अनुसार भारत ने 26 चीनी सैनिकों के शव को  चीन को सौपा जिसमे एक चीनी सेना के अधिकारी भी थे ।</p> <p style="text-align:justify;"> </p><p style="text-align:justify;"></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>International</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2020 19:06:08 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय प्रतिक्रिया चीन(China) को एक और तिब्बत(Tibet) बनाने में सहयोग ही करेगा ..</title>
                                    <description><![CDATA[सागर सूरज @बीएनएम मोतिहारी:भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख, कालापानी मुद्दे पर जारी तल्खी का असर बिहार-नेपाल के सरहद पर भी देखा जा रहा है। गेटवे-ऑफ इंडिया(Gateway of india) के नाम से प्रसिद्ध रक्सौल-बीरगंज सीमा (Raxaul-Birgunj border) सहित चंपारण एवं चंपारण से लगे जिलों के ‘नेपाल सीमा’ पर इन दिनों दोनों देशों के लोगों के बीच लगातार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bordernewsmirror.com/article/1901/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-china--%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%8F%E0%A4%95"><img src="https://bordernewsmirror.com/media/400/2021-12/images-92.jpg" alt=""></a><br />  <ins class="adsbygoogle"></ins>    <p><span style="color:#ff0000;"><strong>सागर सूरज @बीएनएम</strong></span></p> <p style="text-align:justify;">मोतिहारी:भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख, कालापानी मुद्दे पर जारी तल्खी का असर बिहार-नेपाल के सरहद पर भी देखा जा रहा है। गेटवे-ऑफ इंडिया(Gateway of india) के नाम से प्रसिद्ध रक्सौल-बीरगंज सीमा (Raxaul-Birgunj border) सहित चंपारण एवं चंपारण से लगे जिलों के ‘नेपाल सीमा’ पर इन दिनों दोनों देशों के लोगों के बीच लगातार खटास बढ़ती जा रही है। हाल के कुछ घटनाओं पर अगर नजर डालें तो इस खटास के पीछे सीमा पर तैनात नेपाल के सुरक्षा एजेंसियों की भारतीय लोगों को उकसाने वाली लगातार कार्रवाईयां महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। नेपाल के राजशाही व्यवस्था के द्वारा स्थापित ‘बेटी-रोटी की संबंधों’ एवं ‘सांस्कृतिक एकरूपता’ जैसी अलंकारों की दुहाई दे- दे कर सैकड़ों वर्षों से साथ-साथ जीने वाले दोनों देशों के लोगों के ऊपर नेपाल के ओली सरकार के महत्वकांक्षाओं का ग्रहण लग चूका है। भारत-नेपाल के 1751 किलोमीटर सरहद पर तैनात एसएसबी के जवानों की प्रशंसा करनी होगी जो नेपाल आर्म्ड फ़ोर्स के जवानों के ‘अति-प्रक्रियात्मक’ कार्रवाईयों को भी शांतिपूर्ण ढंग से समाधान करने का लगातार प्रयास कर रही है, अब तक इस इलाकें में भारत का बिहार के पश्चिमी चंपारण के सुस्ता इलाकों सहित कई जगहों पर नेपाल से भूमि विवाद है। कालापानी एवं लिपुलेख आदी भारतीय इलाकें को अपने क्षेत्र में शामिल करने सम्बंधित एक विधयेक नेपाल के निचले सदन से पास हो चूका है। </p> <p style="text-align:justify;">नेपाल में भारत विरोधी हवाएं तेज़ी से बढ़ रही है और उसी का प्रतिविम्ब भारतीय सीमाओं पर भी दिख रहा है। बिहार के सीतामढ़ी(Sitamarhi firing) के नारायणपुर लामबंदी सीमा पर दो दिन पूर्व नेपाल के एक गोरखा पुलिस द्वारा भारतीय ग्रामीणों पर फायरिंग की घटना तो महज एक बानगी मात्र है। इस घटना में एक भारतीय की मौत हो चुकी है वही दो घायलों का इलाज सीतामढ़ी के एक अस्पताल में चल रहा है। इसी मामले में नेपाल पुलिस ने एक भारतीय को गिरफ्तार करने के बाद उसे जबरदस्त प्रताड़ना दे कर घटना के 48 घन्टे बाद छोड़ तो दिया लेकिन इसके साथ ही इस घटना ने दोनों देशों के सीमाई क्षेत्रों के ग्रामीणों के बीच के आपसी संबंधों में पलीता लगाने का कार्य किया। नेपाल पुलिस का दावा था कि भारतीय लोग नेपाल में प्रवेश कर लॉक डाउन का उल्लंघन करते हुये उनके साथ दुर्व्यवहार भी कर रहे थे। 13 जून को पूर्वी चंपारण के कुंडवा चैनपुर के बलुआ गाँव के पास स्थित नेपाल बॉर्डर के पास भी कुछ ऐसी ही घटना घटी। यह घटना सीतामढ़ी वाली घटना से मिलती जुलती है। इस बार एसएसबी जवानों ने नेपाल से आ रहे लोगों को भारतीय क्षेत्रों में लॉक डाउन को लेकर प्रवेश करने से मना किया तो नेपाल के तरफ से सैकड़ों लोग जमा होकर एसएसबी जवानों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। फिर क्या था भारतीय ग्रामीण भी बड़ी संख्या में जमा हो गए। लेकिन एसएसबी के अधिकारियों ने सूझ-बुझ का परिचय दिया ना की ग्रामीणों पर गोलियां चलायी। इस घटना के एक दिन पूर्व यानि 12 जून को रक्सौल स्थित मैत्री पूल के पास नेपाल पुलिस ने करोना से मरे कुछ शव को जमीन के गड्डे में दफना रहे थे जिसका विरोध एसएसबी के जवानों ने किया, लेकिन फिर भी शवों को वही दफ़न कर दी गयी। नतीजतन स्थानीय लोगों में आक्रोश है और एसएसबी अधिकारी मामले को तुल नहीं देना चाहते है। बिहार के इन सीमाओं पर नेपाल पुलिस द्वारा हो रहे उकसावे की छोटी-छोटी घटनाओं को नजरंदाज़ करना ही श्रेस्कर कर है वर्ना नेपाल जिस तरह चीन के गोद में अति-उत्साह में खेल रहा है। हम अपने प्रतिक्रिया से चीन को दूसरा तिब्बत बनाने में मदद ही करेंगे। </p> <p><b>(लेखक अंग्रेजी और हिंदी समाचार पत्रों में सीमाई क्षेत्रों से लिखते रहे है</b></p>   <img width="800" height="600" src="https://bordernewsmirror.com/media/2021-12/img-20200614-wa0004-800x600.jpg" alt="" class="wp-image-12201"></img>भारतीय लगन राम जिसे नेपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया था      <ins class="adsbygoogle"></ins> ]]></content:encoded>
                
                                                            <category>International</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2020 18:14:41 +0530</pubDate>
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