80 किलो चरस बरामदगी केस में आरोपियों की रिहाई पर जांच, तीन सदस्यीय कमिटी गठित
तत्कालीन थानाध्यक्ष, अनुसंधानकर्ता और अभियोजन पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के घेरे में
मोतिहारी/सुगौली। पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में दर्ज करीब 80 किलो चरस बरामदगी के चर्चित मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की रिहाई के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमिटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा करेगी।

जानकारी के अनुसार 21 मार्च 2024 को सुगौली थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर मुन्ना कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि नेपाल की ओर से मोटरसाइकिल के माध्यम से मादक पदार्थ की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने छोटा बंगरा के पास टोल प्लाजा के समीप घेराबंदी कर वाहन जांच अभियान चलाया। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध युवकों को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान उनके पास से बड़ी मात्रा में चरस बरामद होने का दावा किया गया। इसके आधार पर सुगौली थाना कांड संख्या 123/24 दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में राजकिशोर सिंह पिता मोहन सिंह निवासी छोटा बंगरा थाना सुगौली, विकास सिंह पिता रामजी सिंह तथा विवेक कुमार पिता पंकज सिंह शामिल थे। बरामदगी की मात्रा करीब 80 किलो चरस बताई गई थी और मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया था, जिसे गंभीर अपराध माना जाता है।
हालांकि बाद में अदालत से तीनों आरोपियों को रिहाई मिल गई। आरोपियों की रिहाई के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया, जब्ती सूची और साक्ष्यों को लेकर कई सवाल उठने लगे। सूत्रों के अनुसार केस डायरी, जब्ती सूची और साक्ष्य संकलन में संभावित त्रुटियों के कारण मामला अदालत में मजबूती से प्रस्तुत नहीं हो सका, जिसके कारण आरोपियों को राहत मिल गई।
इसी को देखते हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमिटी गठित की है। इस कमिटी में डीएसपी मुख्यालय, साइबर डीएसपी और सदर एसडीपीओ को शामिल किया गया है। कमिटी को तत्कालीन अनुसंधानकर्ता, थानाध्यक्ष और मामले से जुड़े अभियोजन पदाधिकारी की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया गया है।
जांच कमिटी केस से जुड़े सभी दस्तावेज, जब्ती सूची, साक्ष्य और केस डायरी की समीक्षा करेगी तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों से पूछताछ भी करेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन या प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
गौरतलब है कि जिले में मादक पदार्थ बरामदगी से जुड़े मामलों में पहले भी कई बार जांच और विवाद सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस मामले की जांच रिपोर्ट पर पुलिस विभाग और आम लोगों की नजरें टिकी हुई है।
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