सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा संकेत, IAS आर.एल. चोंग्थू हटे; ‘रूटीन ट्रांसफर’ या क्लीनअप?

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा संकेत, IAS आर.एल. चोंग्थू हटे; ‘रूटीन ट्रांसफर’ या क्लीनअप?

Reported By RAKESH KUMAR
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सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला सिर्फ एक ट्रांसफर नहीं बल्कि सिस्टम में नियंत्रण और साफ छवि बनाने की कोशिश के रूप में लिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार ने विवादों से जुड़े और प्रभावशाली पावर सेंटर बन चुके अधिकारियों को साइडलाइन करने की रणनीति अपनाई है।

पटना। नई सरकार बनने के साथ ही प्रशासनिक फेरबदल तेज हो गया है। इसी क्रम में IAS अधिकारी रॉबर्ट एल. चोंग्थू को उनके पद से हटाया गया है। सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला सिर्फ एक ट्रांसफर नहीं बल्कि सिस्टम में नियंत्रण और साफ छवि बनाने की कोशिश के रूप में लिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार ने विवादों से जुड़े और प्रभावशाली पावर सेंटर बन चुके अधिकारियों को साइडलाइन करने की रणनीति अपनाई है।
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चोंग्थू का नाम पहले भी विवादों में रहा है। सहरसा में जिलाधिकारी रहते हुए उन पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने में अनियमितता के आरोप लगे थे। बताया गया था कि करीब 229 लाइसेंस बिना उचित पुलिस सत्यापन के जारी किए गए। जांच में कई आवेदकों के पते संदिग्ध पाए गए थे, जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ा।
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और धोखाधड़ी, जालसाजी व साजिश जैसी धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2022 में केस फिर से सक्रिय हुआ, उस समय चोंग्थू राजभवन में राज्यपाल के प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे।
मामला अदालत तक पहुंचा, जहां उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने तकनीकी कारणों और प्रक्रिया में खामियों के आधार पर मामले को समाप्त कर दिया। हालांकि अदालत की टिप्पणी को लेकर यह चर्चा बनी रही कि यह पूर्ण क्लीन चिट नहीं थी।
प्रशासनिक स्तर पर भी चोंग्थू चर्चा में रहे। राजभवन में रहते हुए शिक्षा विभाग के साथ उनका टकराव सामने आया था, जिससे शासन व्यवस्था में असहज स्थिति पैदा हुई। अधिकारियों के बीच खींचतान की वजह से फैसलों पर असर पड़ने की बातें भी सामने आई थीं।
ऐसे परिदृश्य में नई सरकार का यह कदम प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने और स्पष्ट संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे सामान्य प्रक्रिया बताया गया है, लेकिन समय और परिस्थितियां इस फैसले को खास बनाती हैं।
फिलहाल इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं और इसे सरकार के शुरुआती संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि आगे प्रशासनिक स्तर पर और भी कड़े फैसले हो सकते हैं।
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