एक सड़े आम के चक्कर में खाकी वर्दी पर दाग लगाने की भरपूर कोशिश नाकाम, व्यवसायी ने जताया खेद

एक सड़े आम के चक्कर में खाकी वर्दी पर दाग लगाने की भरपूर कोशिश नाकाम, व्यवसायी ने जताया खेद

हरसिद्धि वायरल वीडियो प्रकरण की जांच में सामने आई सच्चाई, फल विक्रेता ने लिखित आवेदन देकर जताया खेद

Reported By RAKESH KUMAR
Updated By RAKESH KUMAR
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मोतिहारी। हरसिद्धि बाजार में पुलिस और एक फल विक्रेता के बीच हुए विवाद का वायरल वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ था। मामले की जांच के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विवाद की जड़ एक सड़ा हुआ आम था और बाद में गलतफहमी तथा अधूरी जानकारी के कारण इसे अनावश्यक रूप से तूल दिया गया।

 

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पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हरसिद्धि थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक प्रीतम कुमार ने एक फल विक्रेता से 750 ग्राम आम खरीदा था। घर पहुंचकर जब आम काटा गया तो वह अंदर से सड़ा हुआ निकला। इसकी शिकायत लेकर पुलिस अधिकारी जब दुकानदार के पास पहुंचे तो दोनों के बीच कहासुनी हो गई।
विवाद की सूचना पर गश्ती पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। बातचीत के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी। एहतियातन दुकानदार को पूछताछ के लिए थाना ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों के अनुरोध पर मामला मौके पर ही शांत करा दिया गया।
इसी दौरान घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अरेराज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
जांच के दौरान फल विक्रेता चन्द्रिका साह और उनके पुत्र रूपेश कुमार ने लिखित आवेदन देकर स्वीकार किया कि सड़े हुए आम को लेकर गलतफहमी में विवाद हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बयान और वायरल वीडियो के कारण मामला जरूरत से ज्यादा बढ़ गया, जिसका उन्हें खेद है। दोनों ने स्पष्ट किया कि अब उन्हें पुलिस से किसी प्रकार की शिकायत नहीं है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने बताया कि घटना के संदर्भ में पुलिस अवर निरीक्षक प्रीतम कुमार को भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की चेतावनी दी गई है। साथ ही सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को आम जनता के साथ सौम्य, संयमित और सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि एक साधारण उपभोक्ता विवाद सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस की छवि पर प्रश्नचिह्न लगाने का माध्यम बन गया। हालांकि जांच में तथ्य सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला किसी गंभीर दुर्व्यवहार का नहीं, बल्कि गलतफहमी और आपसी विवाद का था, जो अंततः दोनों पक्षों की सहमति से समाप्त हो गया।
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