तस्कर–अफसर गठजोड़? सीमा सुरक्षा पर सवाल

तस्कर–अफसर गठजोड़? सीमा सुरक्षा पर सवाल

Reported By SAGAR SURAJ
Updated By RAKESH KUMAR
On
मामला सुगौली थाना क्षेत्र का है, जहां 21 मार्च को टोल प्लाजा और बंगरी गांव के पास से करीब 80 किलो चरस और गांजा बरामद किया गया था। उस समय तत्कालीन एसपी कांतिश मिश्रा ने तस्करों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी सफलता बताया था। लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान अनुसंधान में गंभीर खामियां सामने आने के बाद तीनों आरोपियों को रिहा कर दिया गया।

मोतिहारी। भारत–नेपाल सीमा से सटा पूर्वी चंपारण जिला लंबे समय से चरस, हेरोइन, गांजा और हाशिश जैसे खतरनाक मादक पदार्थों की तस्करी का अहम रास्ता माना जाता रहा है। समय–समय पर पुलिस की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नशे की खेप बरामद होती है, लेकिन कमजोर अनुसंधान और कथित मिलीभगत के कारण कई मामलों में तस्कर अदालत से राहत पा जाते हैं। ऐसे घटनाक्रम न केवल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं, बल्कि सीमा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर हमला करते नजर आते हैं।
ताजा मामला सुगौली थाना क्षेत्र का है, जहां 21 मार्च को टोल प्लाजा और बंगरी गांव के पास से करीब 80 किलो चरस और गांजा बरामद किया गया था। उस समय तत्कालीन एसपी कांतिश मिश्रा ने तस्करों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे बड़ी सफलता बताया था। लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान अनुसंधान में गंभीर खामियां सामने आने के बाद तीनों आरोपियों को रिहा कर दिया गया।

b10c24c6-1abe-4617-8844-46909655296b
बताया जाता है कि सुगौली के तत्कालीन थानाध्यक्ष मुन्ना कुमार ने बरामदगी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी और मामले की जांच पुलिस अधिकारी शंभु साह को सौंपी गई थी। यहीं से लापरवाही या साजिश के आरोपों की शुरुआत होती है। पुलिस ने 90 दिन से पहले चार्जशीट दाखिल तो कर दी, लेकिन जब्ती सूची तैयार करने वाले मजिस्ट्रेट का बयान केस डायरी में दर्ज नहीं किया गया। इसके अलावा दो अलग-अलग जगहों से बरामदगी होने के बावजूद सिर्फ एक जगह का सैंपल ही जांच के लिए भेजा गया। इन कमियों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को “बेनिफिट ऑफ डाउट” देते हुए रिहा कर दिया।
सुगौली में इससे पहले भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आ चुका है, जब रेलवे स्टेशन से बरामद करीब 24 किलो चरस अदालत पहुंचने तक ईंट में तब्दील पाया गया था। उस प्रकरण में जब्ती सूची बनाने वाले तत्कालीन सीओ कुंदन कुमार समेत जीआरपी और आरपीएफ के कई अधिकारियों पर आर्थिक अपराध का मामला दर्ज किया गया था।
इसी तरह रक्सौल के एक मामले में 11 किलो चरस बरामदगी के बावजूद साक्ष्य के अभाव में उच्च न्यायालय से आरोपियों को जमानत मिल गई थी। उस समय पुलिस पर निर्दोष लोगों को सड़क से उठाकर फंसाने तक के आरोप लगे थे।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सीमा क्षेत्र में तस्करों को वर्दी की छत्रछाया मिल रही है। हालांकि, एसपी स्वर्ण प्रभात ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। 
टीम एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देगी, जिसके बाद यह साफ हो सकेगा कि 80 किलो चरस बरामदगी मामले में हुई चूक महज लापरवाही थी या इसके पीछे कोई बड़ा गठजोड़ काम कर रहा था।

Tags:

Post Comment

Comments

राशिफल

Live Cricket

Recent News

अभिभावक गोष्ठी में बच्चों के संस्कार और शिक्षा पर जोर, अभिभावकों ने दिए बहुमूल्य सुझाव अभिभावक गोष्ठी में बच्चों के संस्कार और शिक्षा पर जोर, अभिभावकों ने दिए बहुमूल्य सुझाव
हरसिद्धि, पूर्वी चंपारण। स्थानीय विद्यालय महावीर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शनिवार को अभिभावक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम...
पंचायती राज मंत्री के साथ मंच साझा करते दिखे सरकारी शिक्षक, सेवा आचरण पर उठे सवाल
मोतिहारी शराब कांड की सप्लाई चेन का बड़ा खुलासा, गाजियाबाद से हुई गिरफ्तारी 
मोतिहारी में निगरानी का बड़ा ट्रैप: आदापुर थाना का निजी मुंशी 14 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार
सिकरहना एसडीपीओ कानून के सिकंजे मे, न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप पर कोर्ट ने लिया संज्ञान 
मदरसा में पुलिस का बड़ा छापा, अत्याधुनिक पिस्टल बरामद; तीन हिरासत में, परिसर सील; चकिया में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
तुरकौलिया में जहरीले पदार्थ का कहर: 4 की मौत, 6 का इलाज जारी, मुख्य साजिशकर्ता समेत 12 गिरफ्तार

Epaper

YouTube Channel

मौसम

NEW DELHI WEATHER