नेपाल में ब्राउन शुगर का संजाल
खुली सीमा, बढ़ती तस्करी और पुलिस की चुनौती: नेपाल में ब्राउन शुगर कारोबार के फैलते नेटवर्क पर विशेष रिपोर्ट
सागर सूरज
बीरगंज (नेपाल)। भारत-नेपाल सीमा पर लगातार हो रही मादक पदार्थों की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि सीमापार नशीले पदार्थों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही कार्रवाई में बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर, गांजा और अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थ पकड़े जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय अवैध नेटवर्क द्वारा तैयार या संग्रहित नशीले पदार्थों के लिए भारत एक प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है।
हालांकि नेपाल सरकार और पुलिस तंत्र इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चला रहे हैं, लेकिन सीमावर्ती और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में ड्रग्स माफियाओं की बढ़ती पैठ कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।
यही कारण है कि मादक पदार्थों की तस्करी अब केवल अपराध का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह दोनों देशों की सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है।
नेपाल में ब्राउन शुगर (ब्राउन हेरोइन) की तस्करी और इसके बढ़ते सेवन ने कानून-व्यवस्था तथा स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।
हाल के महीनों में भारत सहित नेपाल के विभिन्न सीमावर्ती जिलों में पुलिस ने कई बड़ी कार्रवाइयाँ करते हुए मादक पदार्थों की खेप बरामद की है और अनेक तस्करों को गिरफ्तार किया है।
अप्रैल 2026 में नेपाल के मोरंग जिले के रतुवामाई क्षेत्र में पुलिस ने एक युवक को लगभग 448 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया।
इसी प्रकार नेपाल के बांके जिले के नेपालगंज और झापा जिले में भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सैकड़ों ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की तथा कई संदिग्ध तस्करों को पकड़ा। भारत के पूर्वी चम्पारण मे भी ब्राउन शुगर की कई जप्तियां हाल के दिनों मे चिंता की कारण बनी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ब्राउन शुगर का कारोबार अब छोटे स्तर की तस्करी तक सीमित नहीं रहा। यह एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों का उपयोग परिवहन मार्ग के रूप में किया जाता है। तस्करों की बढ़ती सक्रियता के कारण पुलिस को रातभर गश्त और निगरानी बढ़ानी पड़ रही है।
नेपाल के मोरंग में विशेष अभियान
मोरंग जिला हाल के वर्षों में मादक पदार्थों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। बढ़ती समस्या को देखते हुए पुलिस ने "ड्रग फ्री मोरंग अभियान" चलाया। एक माह के अभियान के दौरान 821 ग्राम ब्राउन शुगर, 92 किलोग्राम गांजा, विभिन्न प्रतिबंधित दवाइयाँ और अन्य मादक पदार्थ बरामद किए गए। इस दौरान 436 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कई लोगों को परामर्श देकर उनके परिवारों को सौंपा गया तथा कुछ को पुनर्वास केंद्र भेजा गया।
इसके बाद मई 2026 में नेपाल मे प्रदेश स्तर पर एक व्यापक मादक पदार्थ विरोधी अभियान शुरू किया गया, जिसका मुख्य लक्ष्य ब्राउन शुगर के बढ़ते नेटवर्क पर नियंत्रण पाना है। पुलिस का मानना है कि केवल कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी भी आवश्यक है।
बढ़ते आंकड़े, बढ़ती चिंता
वित्तीय वर्ष 2024/25 में नेपाल भर में 5,061 मादक पदार्थ संबंधी मामले दर्ज हुए, जिनमें से 1,437 मामले केवल कोशी प्रदेश में दर्ज किए गए। इसी अवधि में देशभर में 7,890 लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें 2,203 लोग कोशी प्रदेश से थे।
पुलिस के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में ब्राउन शुगर की बरामदगी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां कुछ वर्ष पहले इसकी बरामद मात्रा सीमित थी, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि तस्करी और खपत दोनों में वृद्धि हुई है।
अरबों का अवैध कारोबार
नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार ब्राउन शुगर की कीमत स्थानीय बाजार में लगभग 8,000 से 12,000 नेपाली रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच सकती है। इस आधार पर एक किलोग्राम ब्राउन शुगर की कीमत करोड़ों रुपये में होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस द्वारा जब्त की गई मात्रा वास्तविक कारोबार का केवल एक हिस्सा होती है। इसलिए इस अवैध व्यापार का आर्थिक आकार काफी बड़ा माना जा रहा है।
समाज पर गंभीर प्रभाव
नेपाल के गृह मंत्रालय द्वारा कराए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार देश में मादक पदार्थों के उपयोगकर्ताओं की संख्या एक लाख से अधिक थी और समय के साथ इसमें वृद्धि होने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि नशीले पदार्थों का सेवन चोरी, लूट, पारिवारिक विवाद, बेरोजगारी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य अपराधों को बढ़ावा देता है।
जेलों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। वर्तमान में नेपाल की जेलों में बंद कैदियों का एक बड़ा हिस्सा मादक पदार्थ संबंधी मामलों में निरुद्ध है। इससे स्पष्ट होता है कि नशे का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुका है।
नेपाल पुलिस मुख्यालय के अनुसार आने वाले समय में मादक पदार्थ विरोधी अभियान को देश के अन्य जिलों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके तहत तस्करों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नशा पीड़ितों के पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावी नियंत्रण के लिए कानून-प्रवर्तन, सामाजिक जागरूकता और सरकारी निवेश—तीनों की समान रूप से आवश्यकता है।
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