56 करोड़ के कॉरपोरेट खाते पर साइबर गिरोह की नजर, मोतिहारी में 9 गिरफ्तार
दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े नेटवर्क का खुलासा, बैंकिंग ओटीपी हैक कर स्विफ्ट कोड से रकम विदेश भेजने की थी साजिश; 10 मोबाइल, लैपटॉप और दो चारपहिया वाहन बरामद
Reported By RAKESH KUMAR
Updated By BORDER NEWS MIRROR
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मोतिहारी। पूर्वी चंपारण पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का खुलासा करते हुए नौ संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह की नजर करोड़ों रुपये जमा वाले कॉरपोरेट बैंक खातों पर थी। गिरफ्तार आरोपितों के पास से 10 मोबाइल, एक लैपटॉप और दो चारपहिया वाहन बरामद किए गए हैं। लैपटॉप से संदिग्ध पोर्टल, बैंक लॉगिन से जुड़ी जानकारी और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से 14 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मोतिहारी साइबर थाना को सूचना मिली थी कि साइबर अपराधियों का एक गिरोह बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहा है। सूचना के आधार पर वरीय अधिकारियों को अवगत कराते हुए छापेमारी टीम गठित की गई। टीम ने पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र में कार्रवाई कर नौ संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।

बैंक खातों की गोपनीय जानकारी जुटाकर करते थे सेंधमारी
पुलिस के मुताबिक, गिरोह को कथित तौर पर अज्ञात बैंककर्मियों के माध्यम से कॉरपोरेट बैंक खातों की गोपनीय जानकारी मिलती थी। इसमें खाताधारक का नाम, यूजर आईडी, मोबाइल नंबर और खाते में उपलब्ध राशि का विवरण शामिल था। इसके बाद लिंक के जरिए मोबाइल पर ओटीपी भेजकर संबंधित मोबाइल तक पहुंच हासिल करने और नेट बैंकिंग में लॉगिन करने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
पुलिस का आरोप है कि नेट बैंकिंग में प्रवेश मिलने के बाद स्विफ्ट कोड के माध्यम से रकम दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े खातों में हस्तांतरित की जाती थी। वहां कुल राशि का 30 प्रतिशत हिस्सा काटने के बाद शेष रकम यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विभिन्न खातों में भेजी जाती थी। बाद में यूएसडीटी बेचकर नकद अथवा बैंक खातों में रकम प्राप्त की जाती थी।

56 करोड़ रुपये वाले खाते को निशाना बनाने की थी योजना
जांच में पुलिस को पता चला कि गिरोह के पास कैंप सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते से संबंधित विवरण उपलब्ध था। पुलिस के अनुसार, इस खाते में करीब 56 करोड़ रुपये जमा थे। आरोपित 12 अक्टूबर 2026 की रात खाते में उपलब्ध पूरी राशि अपने खातों में हस्तांतरित करने की योजना बना रहे थे। समय रहते कार्रवाई होने से कथित साजिश का खुलासा हुआ। हालांकि, पुलिस की विज्ञप्ति में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस मामले में वास्तव में किसी राशि का हस्तांतरण हुआ या नहीं।
पुलिस का कहना है कि गिरोह मुख्य रूप से ऐसे कॉरपोरेट खातों को निशाना बनाता था, जिनमें करोड़ों रुपये जमा रहते थे। मामले के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, कथित बैंककर्मी संपर्कों और धन के लेन-देन की कड़ियों की जांच की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपितों में पूर्वी चंपारण और शिवहर के निवासी
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आनंद किशोर, निवासी मझार, पकड़ीदयाल; अरविन्द कुमार और मनोरंजन कुमार, निवासी सुंदरपुर खरौना, शिवहर; रामनाथ ठाकुर, निवासी चिकनौटा, शिवहर; निरंजन यादव उर्फ नीरज कुमार, निवासी गोनाही, पताही; संतोष राम उर्फ संतोष कुमार, निवासी देवापुर, कल्याणपुर; संदीप कुमार, निवासी बिजुलपुर बकसवा, तुरकौलिया; विजय कुमार, निवासी कोटवा बाजपेयी टोला, पहाड़पुर; और पप्पू जायसवाल, निवासी श्रीपुर भरवलिया, सुगौली के रूप में हुई है।
कार्रवाई में साइबर थाना के प्रभारी अपर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार, अपर थानाध्यक्ष पुलिस निरीक्षक राजीव कुमार सिन्हा, पुलिस अवर निरीक्षक प्रत्युष कुमार विक्की, शिवम सिंह, तकनीकी शाखा और सशस्त्र बल की टीम शामिल थी।
इस मामले में मोतिहारी साइबर थाना कांड संख्या 153/26 दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेश में बैठे कथित संचालकों, बैंक खातों के विवरण लीक होने के स्रोत और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम के हस्तांतरण की कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।
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