लालू के सत्ता के पिलड़ थे शहाबुद्दीन और बृज बिहारी जैसे बाहुबली

लालू के सत्ता के पिलड़ थे शहाबुद्दीन और बृज बिहारी जैसे बाहुबली

90 की दशक मे अपराधी और राजनेता एक ही सिक्के के दो पहलू

Reported By SAGAR SURAJ
Updated By SAGAR SURAJ
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यूं कहे तो तब बिहार मे राजनीति और अपराध एक सिक्के के दो पहलू थे, जो नेता थे वही अपराधी थे और जो अपराधी थे वही नेता थे | ऐसे लोग नेता या जनप्रतिनिधि हो ही नहीं सकते थे, जिनका संबंध अपराधियों से नहीं हो यानि जितना बडा नेता उतना ही बड़ा अपराधी

सागर सूरज

मोतिहारी : बिहार मे 80- 90 की दशक मे लालू प्रसाद यादव के शासन काल में कई बाहुबलियों और अपराधियों ने राजनीतिक छत्रछाया में अपने -अपने इलाके में अपना साम्राज्य कायम किया था | अपराध और राजनीति से चोली दामन का रिश्ता रखने वाले अपराधियों और बाहुबलियों मे मो शहाबुद्दीन, मुजफ्फरपुर के शुक्ला बंधु, देवेंद्र नाथ दुबे, मंत्री बृजबिहारी प्रसाद, सूरजभान सिंह जैसे कई ऐसे चर्चित नाम थे, जिनकी चर्चा के बिना ना तो राजनीति पूरी होती थी और ना ही अपराध की दुनिया की बातें |

यूं कहे तो तब बिहार मे राजनीति और अपराध एक सिक्के के दो पहलू थे, जो नेता थे वही अपराधी थे और जो अपराधी थे वही नेता थे | ऐसे लोग नेता या जनप्रतिनिधि हो ही नहीं सकते थे, जिनका संबंध अपराधियों से नहीं हो यानि जितना बडा नेता उतना ही बड़ा अपराधी |

अपराधियों के लिए नेता गिरी एक ऐसा माध्यम था जहां धन और प्रभाव दोनों ने मिलकर एक उद्धोग का रूप ले चुका था | सरकारें भी अपराधी ही बनाया करते थे | क्योंकि अपराधी या तो खुद विधायक या सांसद बन जाते थे या विधायक और सांसद इस लोगों की मर्जी के बिना कोई बन ही नहीं सकता था , इसीलिए आम आदमी भी विधायक और सांसदों से किसी भी तरह के पैरवी को लेकर इलाके के बाहुबली या कोई बड़े अपराधी के शरण मे ही जाना बेहतर समझते थे |

यह उद्योग पैसा तो दिलाता ही था साथ ही कानून से बचने का बड़ा माध्यम था | जयप्रकाश नारायण, राजेन्द्र प्रसाद और महात्मा गांधी की इस धरती पर आजादी के बाद से ही उनका प्रभाव धीरे धीरे काम होता गया और ये आपराधिक चेहरे पहले तो अपने कठपुतलियों को सत्ता पर आसीन किए, फिर कई खुद ही चुनाव लड़कर, वोटरों और प्रत्याशियों को डरवा कर सत्ता पर काबिज हुए और सरकारों मे शामिल हो गए | ये अपराधी बाहुबली इतने ताकतवर थे की सरकारे वी डरती थी |

सिवान के बाहुबली मो शहाबुद्दीन और लालू प्रसाद यादव के बीच बात- चीत का एक औडियो वायरल हुआ था जिसमे शहबुद्दीन तत्कालीन सिवान एसपी को हटाने को लेकर लालू प्रसाद यादव पर दबाब बना रहे थे और औडियो से प्रतीत हुआ था फोन के बाद लालू प्रसाद यादव काफी परेशान लगे और अपने आदमी को एसपी को फोन लगाने को बोले | शहाबुद्दीन की वजह से सिवान इलाके के ना केवल कई विधायक लालू की सरकार की मदद करते थे, बल्कि बिहार भर के मुसलमानों की एक बड़ी संख्या मो शहबुद्दीन की वजह से लालू प्रसाद यादव के लिए एक जुट थे |

जहां शहबुद्दीन सिवान, गोपालगंज और छपरा आदि जिले मे अपने प्रभाव को बना कर रखे थे वही ब्रिजबिहारी प्रसाद अपने बाहुबल से बिहार के सभी बड़े ठेके को काबू मे बनाए हुए थे | पूर्वी चंपारण के आदापूर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने जाने के बाद ब्रिज बिहारी प्रसाद लालू कैबिनेट मे ऊर्जा मंत्री तक रहे, लेकिन पूर्वी चंपारण के ही गोबिंदगंज विधायक देवेन्द्र नाथ दुबे से उनकी अदावत हुई और पहले देवेन्द्र नाथ दुबे की हत्या हुई फिर ब्रिज बिहारी प्रसाद की | बिहार की राजनीति खून से रक्त रंजीत हुई |


इस बदले की खूनी संघर्ष मे मोकामा के बाहुबली और सांसद सुरजभान सिंह, मुजफ्फरपुर के शुक्ला बंधु सहित उत्तर प्रदेश के डॉन श्री प्रकाश शुक्ला तक को शामिल होना पड़ा तब जा कर लालू के मंत्री ब्रिज बिहारी प्रसाद को पटना मे गोलियों से भुना जा सका |  

शहबुद्दीन की हालत तो ये थी कि उसका नाम सुन कर पूरे प्रदेश के अधिकारियों के हाँथ पाँव फूल जाते थे | अगर किसी कारण से शाहबुद्दीन जेल चला जाता तो जेल से ही अपने आपराधिक साम्राज्य को संचालित करता था | कुछ समय तो सिवान मे शाहाबुद्दीन ने समानंतरण प्रशासन ही चलाया | कोई भी पंचायती, मुकदमा, स्थानांतरण ऐसे सारे मामले शहाबुद्दीन के अपने अदालत मे ही निर्णय होते थे और लोगों को मानना पड़ता था | चन्दरकेश्वर उर्फ चंद बाबू के तीन तीन बेटों के हत्या और पत्राकार राजदेव  रंजन जैसे कई दर्जन हत्या के मामलों के अभियुक्त शहाबुद्दीन की मौत करोना से तब हुई जब वे तिहाड़ जेल मे हत्या के ही एक मामले मे उम्र कैद की सजा भुगत रहे थे |             

 

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