एक ओर ‘नंदी महाराज’ को विधि-विधान से विदाई, दूसरी ओर पालतू बिल्ली की तलाश में जुटी पुलिस

एक ओर ‘नंदी महाराज’ को विधि-विधान से विदाई, दूसरी ओर पालतू बिल्ली की तलाश में जुटी पुलिस

Reported By SAGAR SURAJ
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विजय कुमार

रक्सौल : पूर्वी चंपारण ज़िले में रविवार का दिन पशु प्रेम और मानवीय संवेदना के अद्भुत उदाहरण के रूप में याद किया जा सकता है। 

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जहां एक ओर रामगढ़वा बाजार में एक प्रसिद्ध बेजुबान सांड “नंदी महाराज” को हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई दी गई, वहीं मोतिहारी नगर थाना में एक व्यक्ति अपनी लापता बिल्ली की शिकायत लेकर पहुँचा, जिस पर पुलिस ने भी गंभीरता से कार्रवाई शुरू कर दी। 

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पहली घटना रामगढ़वा के गोला रोड की है, जहाँ बीते रविवार दोपहर नंदी महाराज घायल होकर गिर गए थे।

 स्थानीय लोगों ने भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, पर उनका मोबाइल बंद मिला। 

बाद में एक निजी डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन रात साढ़े आठ बजे “नंदी महाराज” ने दम तोड़ दिया।उनके निधन के बाद गाँव भर में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मुखिया अर्जुन प्रसाद, समाजसेवी कुणाल गुप्ता, कृष्णा कुमार उर्फ गब्बर, अंकित कुमार, राजेश गुप्ता, और सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर नंदी महाराज का हिंदू परंपरा के अनुसार दाह संस्कार किया। 

जेसीबी और ट्रैक्टर से शव को घाट तक ले जाया गया। स्थानीय थानाध्यक्ष राजीव साह के निर्देश पर चौकीदार सोनू यादव सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद रहे।

उधर, दूसरी ओर मोतिहारी नगर थाना में एक ऐसी शिकायत दर्ज हुई जिसने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया। राजेश कुमार, निवासी मिस्कॉट क्षेत्र, ने अपनी पालतू बिल्ली के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। 

राजेश ने बताया कि उनकी बिल्ली परिवार का सदस्य जैसी है और उसे लौटाने की गुहार लगाई।आश्चर्यजनक रूप से पुलिस ने भी इस मामले को संवेदनशीलता से लिया। 

नगर थाना प्रभारी ने बिल्ली की फोटो सभी गश्ती दलों को सौंपकर तलाश का निर्देश दिया है। दोनों घटनाओं ने यह साबित किया कि संवेदना अभी भी ज़िंदा है। जहाँ रामगढ़वा में पशु को सम्मानजनक विदाई दी गई, वहीं मोतिहारी में इंसानों के साथ पशु के अधिकारों के प्रति नई जागरूकता दिखी है।

यह उदाहरण दिखाता है कि ज़िले में इंसानियत और करुणा केवल शब्द नहीं, बल्कि अब भी समाज की जीवंत भावना है — जहाँ पशु भी परिवार हैं, और संवेदना ही सबसे बड़ी संस्कृति।

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