
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे कोविड-19 संकट के बीच ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के तहत अब तक छह राज्यों में प्रवासी श्रमिकों को 9.79 लाख से अधिक दिनों के बराबर काम दे चुका है। रेल मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में बताया कि ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ में 18 सितम्बर तक करीब 12,276 श्रमिकों को […]
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे कोविड-19 संकट के बीच ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के तहत अब तक छह राज्यों में प्रवासी श्रमिकों को 9.79 लाख से अधिक दिनों के बराबर काम दे चुका है।
रेल मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में बताया कि ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ में 18 सितम्बर तक करीब 12,276 श्रमिकों को जोड़ा जा चुका है। इन परियोजनाओं के लिए ठेकेदारों को 2056.97 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल स्वयं ‘गरीब कल्याण रोज़गार अभियान’ के तहत बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में प्रवासी मजदूरों के लिए काम के अवसरों में हुई प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। इन राज्यों में लगभग 164 रेलवे कार्यों पर काम चल रहा है और कुल 9,79,000 कार्यदिवस (वर्किंग-डे) के बराबर लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। रेलवे ने प्रत्येक जिले के साथ ही राज्यों में भी नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं ताकि राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।
परियोजना के तहत किये जा रहे कार्य
(i) लेवल क्रॉसिंग तक के लिए सड़कों का निर्माण और रखरखाव।
(ii) रेल पटरियों के किनारे बने नालों, खाइयों और सिल्टेज जलमार्गों की साफ सफाई और उन्हें बेहतर बनाया जाना।
(iii) रेलवे स्टेशनों तक पहुंचने के लिए सड़कों का निर्माण और उनका रखरखाव।
(iv) रेल पटरियों के किनारे के जमीनी हिस्सों की मरम्मत,कटिंग और उन्हें चौड़ा किया जाना।
(v) रेलवे की भूमि के आखिरी छोर में वृक्षारोपण करना और
(vi) रेल पटरियों के किनारे के मौजूदा जमीनी हिस्सों की मरम्मत, कटिंग और पुलों की देखभाल से संबंधित काम शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने 20 जून को की थी इस अभियान की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन के दौरान अपने गांव और राज्यों को लौटे प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में ही रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए 20 जून को ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ चलाने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि अभियान के तहत टिकाऊ ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। कुल 125 दिनों का यह अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। इसके तहत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के ऐसे 116 जिलों में 25 विभिन्न प्रकार के कार्य और निर्माण गतिविधियां शामिल की गई हैं जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटे हैं। इन जिलों में चलाए जा रहे सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए 50 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों व विभागों का एक संयुक्त प्रयास है जिसमें ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क संगठन, दूरसंचार और कृषि मंत्रालय सहयोग कर रहे हैं। इस अभियान के तहत 25 तरह के सार्वजनिक निर्माण कार्यों और आजीविका के अवसरों से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा करने का काम किया जा रहा है।
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