योगी सरकार में 60 हजार करोड़ का फ़्लैट घोटाला, कोर्ट ने दिया 2800 साल के बाद सुनवाई की तारीख

सागर सूरज

पटना| उतर पदेश के गाज़ियाबाद शहर मे आम आदमी को सस्ते मूल्य पर फ़्लैट उपलब्ध करवाने की योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना में तक़रीबन 60 हजार करोड़ घोटाले का मामला सामने आया है| साथ ही मामले के उद्भेदन के बाद तक़रीबन 30 करोड़ फ्लेट मालिकों के जमीन एवं फ्लेट के स्वत पर भी खतरा मडराने लगा है|

इधर इलाहाबाद उच्च न्यायालय(HIGH COURT) के आदेशों को क्रोशिंग रिपब्लिक एवं गाज़ियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) के द्वारा दरकिनार करने के बाद दायर कंटेम्प्ट में कोर्ट द्वारा सुनवाई की अगली तारीख 1 जनवरी, 5000 यानी 2800 सालों के बाद दिया गया है, जिसकों लेकर आवेदक सामंत कुमार जयसवाल, संजय सिंह और पंकज चन्द्र आदि सकते में है| सुनवाई की तारीख को कोर्ट क्लर्क की मिस्टेक मानते हुए उसे ठीक करवाने को लेकर आवेदक गण लगातार कोर्ट की चक्कर लगा रहे है, वही मामले की लिपा-पोती को लेकर जीडीए (GDA), क्रोसिंग रिपब्लिक एवं बिल्डर्स(CROSSING REPUBLIC & BUILDERS) के लोग लगातार प्रयासरत है|

 

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मामला ये है कि बिल्डर ने बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट हासिल किये एवं गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करने से पूर्व निर्धारित चेक लिस्ट को नजर अंदाज़ करते हुये ना तो पूर्णता सर्टिफिकेट लिया और ना ही किसी भी तरह के मानकों को ही पूरा किया है और ऐसे तक़रीबन 30,000 फ्लेट मालिक ऐसे है जो इस धोखा धडी के शिकार है वही मामले के खुलासे के बाद अधिकारी पैचिंग के सारे हथकंडे अपनाने पर लगे है, लेकिन उच्च न्यायालय लगातार दबिश बनाये हुये है| बता दे कि उक्त चेक लिस्ट के अनुसार पूर्णता प्रमाण पत्र लेने से पूर्व मानचित्रों के स्थल, क्षेत्रफल का सत्यापन, सड़क चौडीकरण, ग्रीन बेल्ट, पार्क कीड़ा स्थल, निर्मित भवन के उचाई, दुकान स्कूल, नर्सिंग होम, सोलर वाटर हीटिंग सेण्टर, फायर फाइटिंग, लिफ्ट, बृक्ष, सीडियां, भूकंप रोधी निर्माण आदि का सत्यापन बिल्डर्स जीडीए को करना था, परन्तु बिल्डर्स ने सभी फ्लेटों को बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के ही बेच दिया|

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और सीआईसीएल ने तक़रीबन आठ बिल्डर्स के हाथों इस योजना को कार्यरूप देने के लिए अधिकृत किया लेकिन बिल्डर्स ने नियमों के विरुद्ध जा कर अवैध रूप से बैंकों के माध्यम से इन फ्लैटों एवं जमीनों को बेच डाला|

बता दे कि बिहार के मोतिहारी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता (RTI ACTIVIST) नागेन्द्र जयसवाल ने सर्वप्रथम बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के 150 लोगों के नाम फ्लेट निबंधन के ऊपर सवाल खड़ा किया तो योगी सरकार के इस घोटाले के परत दर परत खुलते चले गए| 

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