हाल मोतिहारी : केके पाठक डाल –डाल तो ‘घोस्ट शिक्षक’ पात-पात

हाल मोतिहारी : केके पाठक डाल –डाल तो ‘घोस्ट शिक्षक’ पात-पात

27 वर्षों से लिपिक फरार लेकिन उठती रही सैलरी   

Reported By SAGAR SURAJ
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प्रधानाध्यापक विनोद कुमार बैठा के कारगुजारियों की कमी नहीं है और विभाग भी इनसे काम नहीं है | विद्यालय मे शिक्षकों, लिपिकों की रिक्तियों पर नजर डाली जाए तो शारीरिक शिक्षक का एक पद है, लेकिन इस पर दो लोग कार्यरत है

 

सागर सूरज

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मोतिहारी: बिहार के शिक्षा विभाग के सचिव केके पाठक का जलवा भले ही किसी अन्य जिले मे जितना भी दिखे, लेकिन पूर्वी चंपारण का शिक्षा विभाग मे ना तो कोई शिक्षक, अधिकारी उनसे डरता है और ना ही उनके द्वारा बनाए जा रहे किसी भी नियम को कोई तवज्जो ही देता है |

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 संग्रामपुर प्रखण्ड के ठिकाहाँ भवानीपुर हनुमान माध्यमिक विद्यालय -2 मे 1996 मे पदस्थापित एक लिपिक अंजू कुमारी की कहानी इस जिले की शिक्षा विभाग की कहानी है, जिससे आप दो चार हो सकते है |

1996 मे अपने पदस्थापना के बाद से ही इस महिला को फरार रहने की बात जिले के तकरीबन सभी अधिकारी जानते है, साथ ही फ़रारी की स्थिति मे भी इस लिपिक के सैलरी प्रतिमाह उठाए किये जाते रहे है | वर्तमान मे उनकी सैलरी 90 हजार से ऊपर है |

लिपिक के बदले मे लिपिक के नाम सैलरी स्लिप पर अन्य लोग हस्ताक्षर करते रहे | यही नहीं लिपिक के बदले मे अन्य लोग नामांकन पंजी, उपस्थिति पंजी और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी ) पर भी अंजू देवी के बदले हस्ताक्षर करते रहे और सैलरी का उठाव होता रहा | यही कारण है कि इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी अलग -अलग है | बच्चों से अगर पूछी जाए तो कोई भी बच्चा ना तो अंजू देवी नामक किसी लिपिक को जनता है और ना ही पहचानता है |

विद्यालय के कागजातों को देखने से पता चलता है कि इस गोरखधंधे मे सिर्फ  प्रधानाध्यापक विनोद कुमार बैठा ही शामिल नहीं है बल्कि उनके पहले भी जो प्रधानाध्यापक आए सभी ने इस बहती गंगा मे हाँथ धोया और हिस्से की कुछ राशि ली और सैलरी महिला के पति के हवाले कर दिया | वर्तमान प्रधानाध्यापक की पदस्थापन तो 2007 मे हुई, लेकिन उन्होंने भी इस खेल को और अच्छी तरह आगे बढ़ाने का कार्य किया | 

महिला तो आज तक सैलरी उठाने तक नहीं आई और ना ही स्कूल का कोई शिक्षक, छात्र  भी उनको देख पाया है |

लिपिक के बारे मे जब पता करने का प्रयास किया गया तो मालूम चला वे दिनकर नगर मुजफ्फरपुर मे रहती है और पदस्थापना यानि 27 वर्षों मे कभी भी स्कूल गए ही नहीं | उनके पति संग्रामपुर प्रखण्ड के ही एक गाँव के निवासी बताए जाते |

लिपिकों के उपस्थिति पंजी मे कई बार अंजू देवी का मेडिकल दिखाया गया है और उसको सुधार कर उपस्थिति बना दी गई है | ऐसा तब होता है, जब किसी बड़े अधिकारी को स्कूल मे आने की सूचना होती है | ऐसी स्थिति सिर्फ इसी स्कूल मे नहीं है बल्कि तकरीबन ज्यादातर जगह ऐसे शिक्षक या स्कूल कर्मचारी आपको मिल ही जाएंगे |

इसको लेकर शिक्षा विभाग के सचिव केके पाठक ने कहा कि यह बड़ा ही संगीन मामला है अगर जांच मे आरोप सही पाए जाते है तो लिपिक पर प्राथमिकी के साथ- साथ बिना काम किये सरकारी राशि के उठाव किये गए रकम की वसूली भी की जाएगी |  

 आश्चर्य की बात तो ये है कि बिहार के स्कूलों मे सचिव केके पाठक के प्रताप की खबरे पहुँचने के बाद ऐसे ‘घोस्ट’ शिक्षकों और कर्मचारियों मे डर का माहौल बना और वे अब से भी स्कूल को जॉइन करने का प्रयास किये परंतु अंजू देवी पर केके पाठक का कोई असर नहीं है | उनके उपस्थिति पर हस्ताक्षर 27 वर्षों से दूसरे लोगों द्वारा बनाया जाता रहा है | इसको उनके अपने हस्ताक्षर से मिलान करके भी देखा जा सकता है |    

प्रधानाध्यापक विनोद कुमार बैठा के कारगुजारियों की कमी नहीं है और विभाग भी इनसे काम नहीं है | विद्यालय मे शिक्षकों, लिपिकों की रिक्तियों पर नजर डाली जाए तो शारीरिक शिक्षक का एक पद है, लेकिन इस पर दो लोग कार्यरत है |

 एक वीरेंद्र कुमार है जिनकी पदस्थापन 2010 मे इस पद पर हुई परंतु पुनः दूसरे व्यक्ति राकेश कुमार तिवारी भी इसी पद पर जिला परिषद के माध्यम से 2014 मे आकर जॉइन कर लिए, क्योंकि प्रधानाध्यापक सहित सभी लोग मिले हुए थे इसलिए किसी ने जिला परिषद को इसकी सूचना देने की जरूरत नहीं समझी |

जबकि संग्रामपुर प्रखण्ड मे ही श्री उदय बहादुर सिंह माध्यमिक प्लस 2 विद्यालय एवं दमढ़ी असरफी माध्यमिक प्लस 2 विद्यालय मे रिक्तियों के व्यवजूद एक भी  शारीरिक शिक्षक नहीं है |

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार से जब इसके बारे मे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी |   

 

 
 
 
 

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