पदुमकेर पंचायत में जल नल योजना हुआ फ्लॉप
पताही। बिहार सरकार की महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत संचालित हर घर नल का जल पहुंचाने की योजना लूटी योजना बन गई है। जिसका उदाहरण आप पताही प्रखंड क्षेत्र के पदुमकेर पंचायत के वार्ड नंबर 10 में देख सकते हैं। परंतु राशि उठाव के बाद भी कार्य अधूरा छोड़ कागजी खानापूर्ति की जा रही है जबकि योजना मद की प्रकाशित राशि पंचायत वार्ड क्रियान्वयन के प्रबंधन समिति के खाते में जमा करा दी गई है 18 लाख रुपए की निकासी भी की जा चुकी है। 12 लाख निकासी के बाद 1 जगहों पर एक स्ट्रक्चर खड़ा तो कर दिया गया लेकिन लोगों को एक बूंद पानी भी नदारद है। वहीं दूसरे जगह पर निर्माण को लेकर 8 लाख की निकासी वार्ड सदस्य लक्ष्मी देवी के ससुर एवं सचिव संजय कुमार सिंह के माध्यम से की गई एवं धरातल पर एक आधे अधूरे बोरिंग के साथ स्ट्रक्चर खड़ा करके पैसे का बंदरबांट कर लिया गया। इस संबंध में ग्रामीणों ने मुखिया संगीता देवी एवं अधिकारियों से भी कई बार शिकायत की लेकिन गरीब लाचार व्यक्तियों की आवाज पर अधिकारी मुखिया की दबंगता के कारण बेबस और लाचार होकर करवाई नहीं कर सके।
वही ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वार्ड सदस्य लक्ष्मी देवी के ससुर जगदीश साहनी के द्वारा पैसे निकासी मनमाने तरीके से बोरिंग तो डेढ़ सौ फीट ही गाड़ दिए गए परंतु टावर और पाइप बिछाने का कार्य नहीं किए जाने से लोगों के घर में नल का जल नहीं पहुंच सकी है जिसके कारण इन पंचायत के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घटिया सामग्री के कारण योजना शुरू होने से पूर्व ही कई जगह नल टूट चुके हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इस योजना में मानक के अनुरूप कार्य नहीं किया गया है ठेकेदार द्वारा कार्य कराई गई है ठेकेदार की लापरवाही से योजना कार्य की गति काफी धीमी चल रही है जो 1 वर्ष में भी पूरा नहीं हो सका है। जब मुखिया पति राजू सिंह से संपर्क की गई तो उनके द्वारा आधे अधूरे ही जानकारी दिए और जमीनी विवाद के कारण काम रूकवा देने की बात कही। जिससे स्पष्ट साबित होता है कि पैसे निकासी के बाद जनप्रतिनिधियों द्वारा आपस में बंदरबांट कर ली गई है। वार्ड सदस्य लक्ष्मी देवी के ससुर जगदीश साहनी ने बताया पैसे की जो निकासी हुआ है हमें नहीं बताया जाता है हम पढ़े लिखे नहीं हैं मुखिया जी अपने रिश्तेदार को ही सचिव बनाए है जो चेक पर हमसे सिग्नेचर कराकर पैसे की निकासी वही करते हैं। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी रितु रंजन कुमार से संपर्क की गई उनके द्वारा भी आधे अधूरे जानकारी दी गई धरातल पर हुआ काम और प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा दी गई जानकारी मैच नहीं कर रही थी जिस से अस्पष्ट साबित होता है बिहार सरकार की यह महत्वकांक्षी योजना लूट योजना बन कर रह गई है।
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